कानपुर देहात। किसी गोशाला में इस समय संरक्षित गोवंशों को हरा चारा नहीं मिल रहा है। केवल भूसा के साथ दाना व चोकर दिया जा रहा है। यह तब है जबकि चारा उत्पादक किसानों से हरा चारा खरीदने की योजना है। एक माह बीतने पर अब तक कोई अनुबंध नहीं हो सका है।
जिले में ग्रामीण क्षेत्र में 76 गोशालाएं हैं। वहीं नगरीय क्षेत्र में 13 गोशालाओं का संचालन हो रहा है। करीब 10 हजार से अधिक गोवंश इन गोशालाओं में संरक्षित है। मौजूदा समय में गोशालाओं में हरा चारा का टोटा है। ऐसे में संरक्षित गोवंशों को केवल भूसा ही दिया जा रहा है। इसके साथ दाना व चोकर आदि देने का दावा जिम्मेदार कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति खराब है। अधिकारियों के निरीक्षण में भी गोशालाओं की चरही में सूखा भूसा मिल रहा है।
पूरे साल गोवंशों को हरा चारा मिले और किसानों को भी फायदा हो इसके लिए शुरू की गई हरा चारा खरीद योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। योजना में वृहद गोआश्रय स्थल या फिर गोशाला के करीब चारा उगाने वाले किसानों से अनुबंध किया जाना था। ये किसान गोशालाओं की जरूरत का हरा चारा उपलब्ध कराते और इसके एवज में उन्हें तय मूल्य मिलता। योजना लांच हुए एक माह से अधिक हो चुका है लेकिन इसपर अमल नहीं हो सका है। इसकी वजह से एक भी अनुबंध नहीं हो सका है। सूखा भूसा खाने से संरक्षित गोवंश कमजोर हो रहे हैं।