कानपुर सीएसए में रविवार की आधी रात बीएससी प्रथम वर्ष के छात्रों पर हुए पथराव, तोड़फोड़ के मामले में विश्वविद्यालय और पुलिस प्रशासन बैकफुट पर दिख रहा है। अभी तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन आए दिन हो रहीं ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज करता है और पुलिस हमेशा विश्वविद्यालय प्रशासन को जिम्मेदार बताकर खुद का पल्ला झाड़ लेती है। किसी पर कोई कार्रवाई नहीं होती। हालांकि हर बार मीडिया को बयान देने में दोनों विभागों की तरफ से सख्त कार्रवाई की बात जरूर कह दी जाती है लेकिन उस पर कभी अमल नहीं करते।
पिछले साल अगस्त में ही सीनियर छात्रों ने रैगिंग के नाम पर कई जूनियर छात्रों को जमकर पीटा था। एक सिक्योरिटी गार्ड को पीट-पीटकर अधमरा कर दिया था। फिर भी किसी पर कार्रवाई नहीं हुई। इस साल एक-दो अगस्त को छात्रावासों पर कुछ लोगों ने पथराव किया। इसके बाद छह अगस्त को फिर यही घटना हुई। तब भी कार्रवाई नहीं हुई।
शिक्षक मानते हैं परंपरा
विश्वविद्यालय के कई शिक्षक इन घटनाओं को परंपरा मानते हैं। कहते हैं कि यह तो हमेशा से चला आ रहा है। फ्रेशर पार्टी होने के बाद खत्म हो जाएगा। शिक्षकों के इन्हीं बातों से सीनियर छात्रों को बल मिलता है।
आठ लाख के कैमरे कहां लगा दिए
विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि इस साल आठ लाख के कैमरे पूरे परिसर में लगाए गए हैं जबकि हकीकत में किसी भी हॉस्टल में कोई कैमरे नहीं लगे हैं। अब सवाल है कि आखिर यह आठ लाख के कैमरे विश्वविद्यालय प्रशासन ने लगाए कहां हैं?