कानपुर के जाजमऊ में 13 करोड़ लीटर की क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में रोजाना 40 करोड़ लीटर सीवरेज कचरा आता है। जिसमें से 27 करोड़ लीटर हानिकारक कचरा युक्त पानी सीधे गंगा में जा रहा है। चौंकाने वाले इस दृश्य को मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की टीम के सदस्यों ने देखा। टीम में शामिल केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जोनल आफीसर एसके गुप्ता और गंगा मंत्रालय के विशेषज्ञ प्रो काजमी यह देखकर चकरा गए। उन्होंने कहा कि नालों का कचरा इतनी अधिक मात्रा में गंगा में कैसे जाने दिया जा रहा है।
13 जुलाई 2017 को एनजीटी के आदेश के बाद एक बार फिर से सीपीसीबी, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई सहित शासन और प्रशासन की टीमें गंगा में प्रदूषण की जांच में जुट गई हैं। पिछले कुछ दिनों की जांच और सर्वे में यह बात निकलकर आई है कि सीवरेज नालों से निकलने वाले कचरे से गंगा में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। मंगलवार को जब एनजीटी की टीम ने यह सब अपनी आंखों से देखा तो फिर से यह बात साबित हो गई। इससे पहले एनएमसीजी की टीम ने यहां आकर नालों की स्थित देखकर कहा था कि टेनरियों से ज्यादा कचरा तो सीवरेज नालों से गंगा में गिर रहा है। बाद में यही बात एनजीटी ने भी अपने आदेश में दिया। जिसके आधार पर टीम जांच करने आई है। टीम देर शाम उन्नाव के लिए रवाना हो गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कुलदीप मिश्रा ने बताया कि एनजीटी के निर्देश पर आए अधिकारी अपने साथ कुछ डाटा इकट्ठा करके ले गए हैं।
क्या किया टीम ने
- जाजमऊ के एसटीपी जिसमें सिर्फ सीवरेज नालों के कचरा युक्त पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है, उसकी हर एंगल से फोटो खींची
- किन-किन सीवर लाइनों से कितना डिस्चार्ज आ रहा है इसकी मॉनीटरिंग की
- एक निश्चित समय में कितना कचरा युक्त पानी एसटीपी में जा रहा है, और कितना गंगा में उफान कर जा रहा है, दोनों की रीडिंग ली
- यही काम अब उन्नाव में गंगा किनारे बनाए गए एसटीपी की जांच में किया जाएगा।
- जाजमऊ स्थित एसटीपी पहुंची टीम, फिर गई उन्नाव
- एसटीपी की क्षमता 13 करोड़ की, 40 करोड़ लीटर आ रहा गंदा पानी
- बाकी 27 करोड़ सीधे गंगा में जा रहा कचरा युक्त पानी