पवित्र गंगा नदी के पानी में मिलता सीवर का पानी
कानपुर में एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने गंगा में प्रदूषण बढ़ने से रोकने में लापरवाही करने वाले विभागों को फटकार लगाई है। प्रदूषण मसले पर दिल्ली में हुई सुनवाई में एनजीटी ने कहा कि हरिद्वार से लेकर इलाहाबाद के बीच गंगा किनारे एक लाख से अधिक उद्योग हैं, लेकिन विभागों ने कुछ हजार उद्योगों का जिक्र ही अपनी रिपोर्ट में किया है। विभागीय अधिकारियों से कहा गया है कि वे 18 अक्तूबर की सुबह 10 बजे तक गंगा किनारे स्थापित सभी उद्योगों की रिपोर्ट बनाकर बोर्ड के सामने पेश करें। जिससे इस मामले में किसी नतीजे पर पहुंचा जा सके।
गंगा प्रदूषण मसले को पिछले कुछ दिनों से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा किनारे स्थापित उद्योगों पर शिकंजा कसना शुरू किया था, लेकिन एनजीटी ने इसे सही नहीं माना है। कहा है कि प्रदूषण के लिए वे सभी औद्योगिक इकाइयां जिम्मेदार हैं जो गंगा से दूर जरूर स्थापित हैं, लेकिन उनसे डिस्चार्ज केमिकल युक्त पानी गंगा में ही आकर गिरता है। एनजीटी के विभागों को लगाई गई फटकार के बाद अधिकारियों ने आनन-फानन में रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है।