गंगा को प्रदूषण से बचाने, लोगों को स्वच्छ पानी और स्वस्थ वातावरण देने की सरकार की कवायद की पोल एनजीटी ने अपने एक आदेश से खोल दी। आदेश में कहा है कि पिछले 43 वर्षों से कानपुर नगर और देहात के दो स्थानों पर भूमिगत जल प्रदूषित किया जा रहा है, लेकिन सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया।
पर्यावरण नियमों की अनदेखी करने के लिए एनजीटी ने प्रदेश सरकार पर 10 करोड़ का जुर्माना लगाया है। एनजीटी प्रमुख एके गोयल ने आदेश में कहा है कि जूही कानपुर के राखी मंडी क्षेत्र और कानपुर देहात में रनिया क्षेत्र के खान चांदपुर गांव का भूमिगत जल लापरवाही की वजह से विषैला हो गया।
इस संबंध में पहले भी चेतावनी दिए जाने के बावजूद नियमों की अनदेखी की गई। आदेश में यह भी कहा गया है कि जब जल निगम की तरफ से सीवर लाइन की सफाई के लिए गंगा में नाले खोले जाने की बात प्रदेश सरकार को बताई गई, उस समय भी जाजमऊ की 122 टेनरियां संचालित थीं।
यह भी पर्यावरण के नियमों के विरुद्घ है। इसकी वजह से काफी मात्रा में टेनरियों से प्रदूषित पानी सिंचाई के नाम पर बाहर निकाला जाता रहा। इससे भी गंगा और भूजल के पानी में क्रोमियम का जहर घुलता रहा। इसके अलावा यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी लापरवाही के लिए एक करोड़ राशि जुर्माने के तौर पर देने को कहा गया है।