ऑल इंडिया सुन्नी उलेमा काउंसिल और ऑल इंडिया ख्वातीन बोर्ड के बैनर तले महिला शरई अदालत में अधिकांश मसले तीन तलाक से संबंधित रहे हैं। इनमें कुछ मसले तो शादी होने के साल भर के अंदर के रहे हैं। पति ने पत्नी को धमकी देकर छोड़ दिया। कुछ मसलों में बच्चों को छीनकर बहू को ससुराल पक्ष ने घर से भगा दिया। इस तरह के मसले तेजी से बढ़ भी रहे थे, लेकिन तीन तलाक के कानून की प्रक्रिया शुरू होने के बाद महिला शरई अदालत में इस तरह की शिकायतें आनी लगभग बंद हो गई हैं।
कानपुर में महिला शहर काजी डॉ. हिना जहीर नकवी का कहना है कि जबसे तीन तलाक के संबंध में कानून बनने की प्रक्रिया शुरू हुई है, तलाक के मसले आने बंद हो गए हैं। अब लोग खुद आपस में बैठकर मामला सुलझा लेते हैं।
वहीं, आल इंडिया सुन्नी उलेमा काउंसिल के जनरल सेक्रे टरी हाजी मो. सलीस का कहना है कि, मुस्लिम अब जागरूक हो गए हैं। शरई अदालतों में जाने के बजाय वे आपस में बैठकर अपने मसले खुद सुलझा रहे हैं। दारुल कजाओं से जुड़े उलेमा का कहना है कि तीन तलाक के मसले आना लगभग बंद हो गए हैं।