- एसबीआई में नियुक्तियां 424, रिटायर होेंगे 4160
- 31 दिसंबर 2018 तक 4160 अफसर-कर्मचारी हो जाएंगे सेवानिवृत्त
- कर्मचारियों-अफसरों पर बढ़ेगा काम का बोझ, बैंक की शाखाओं में पहले से कम है स्टाफ
स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआई) में 31 दिसंबर 2018 तक कानपुर समेत देश भर में 4160 अफसर-कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसके सापेक्ष महज 424 अफसर-कर्मचारियों की नियुक्ति हो रही है। इसमें लखनऊ सर्किल में महज 14 अफसर और कर्मचारियों की नियुक्ति होगी। कानपुर नगर लखनऊ सर्किल में ही आता है।एसबीआई की ओर से सेवानिवृत्त और भर्ती 2018 की समीक्षा रिपोर्ट में यह आंकड़े आए हैं। बैंक में स्टाफ भर्ती के लिए पैरवी करने वालों को तगड़ा झटका लगा है। इतनी कम भर्ती होने पर कर्मचारी नेताओं ने नाराजगी भी जताई है।
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एसबीआई के सूत्रों ने बताया कि बैंक में कास्ट कटिंग के चलते भर्ती नहीं की जा रही है। कानपुर की एसबीआई की एक बड़ी शाखा, जहां 10 लाख से अधिक खाताधारक हैं, वहां पर 31 दिसंबर तक तीन कर्मचारी और अफसर सेवानिवृत्त हो जाएंगे, जबकि यहां महज 6 लोगों का ही स्टाफ बचेगा।
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बैंक में भर्ती न होने के कारण कर्मचारियों-अफसरों पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। तमाम कर्मचारी अफसर अवसाद और डायबिटीज रोग का शिकार हो रहे हैं। इसके बाद भी नियुक्तियां नहीं करी जा रही हैं।
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आदमी की कीमत 25 रुपये, मशीन की कीमत डेढ़ रुपया
बैंक के सूत्रों ने बताया कि सरकार डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा दे रही है। सरकार और बैंक प्रबंधन की नीति है कि कम से कम लोग बैंक में आकर बैंकिंग करें, क्योंकि बैंक में आकर रुपये निकालने पर प्रति व्यक्ति बैंकिंग में 25 रुपए का खर्च आता है, जबकि एटीएम मशीन का इस्तेमाल करने पर बैंक प्रबंधन पर डेढ़ रुपए का खर्च आता है। ऐसे में सरकार भर्ती पर फोकस नहीं कर रही है।
अन्य बैंकों का भी बुरा हाल
पंजाब नेशनल बैंक में वित्तीय वर्ष 2017-18 में क्लर्क आदि की भर्ती नहीं की गई। बल्कि तीन हजार लेवल एक के अफसर को लेवल टू का अफसर बना दिया गया। जबकि क्लर्क से लेवल वन में महज 300 का प्रमोशन किया गया। इसी तरह अन्य सरकारी बैंकों में पद बड़ी संख्या में खाली पड़े हैं। पीएनबी के सूत्रों ने बताया कि शहर में बैंक की ऐसी कई शाखाएं हैं, जहां पर सिर्फ तीन अफसर या कर्मचारी कार्यरत हैं।