स्वच्छ भारत मिशन को साकार रूप देने के लिए सरकारें करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं। कानपुर में कुछ ऐसे विभाग हैं, जिनके आगे बजट का अभाव आड़े आ रहा है। इनमें से एक पोस्टमार्टम हाउस भी हैं, लेकिन कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने की चाह हो, तो कुछ भी नामुमकिन नहीं होता।
इसी सोच के साथ कुछ सरकारी डॉक्टरों और चीफ फार्मेसिस्ट ने सरकार के सपने को साकार करने का मन बनाया। खुद की कमाई से पोस्टमार्टम हाउस के सुंदरीकरण का काम करा रहे।
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डेमो पिक
शव रखने केलिए चबूतरा व होगा टीनशेड
प्रदेश सरकार ने पोस्टमार्टम हाउस की नवीन बिल्डिंग का निर्माण तो करवा दिया, लेकिन कुछ खामियां रह गईं। आज भी पोस्टमार्टम के बाद शव को फर्श पर ही रखा जाता है। अब डॉक्टरों और चीफ फार्मेसिस्ट ने मरने के बाद भी उनके सम्मान में चबूतरे का निर्माण कराने का फैसला किया। उनका कहना है कि बारिश के दौरान सबसे ज्यादा लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। इसलिए पूरे परिसर को टीनशेड करवाया जाएगा, ताकि पोस्टमार्टम हाउस आने वालों को परेशानी न उठानी पड़े।
लगेंगे पेड़-पौधे, रखे जाएंगे गमले
डॉक्टरों और चीफ फार्मेसिस्ट के मुताबिक बदबू के कारण पोस्टमार्टम रूम में रुक पाना आसान नहीं होता है, इसलिए बदबू को दूर करने के लिए महकदार फूलों को गमले में लगाया जाएगा। छांवदार पेड़-पौधे भी परिसर में लगाए जाएंगे, ताकि गर्मी के मौसम में लोगों को आराम मिल सके।
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डेमो पिक
वाहनों का प्रवेश पर रोक, स्ट्रेचर पर जाएंगे शव
पहले शव को लेकर आने वाले वाहन सीधे पोस्टमार्टम हाउस के अंदर तक घुस आते थे। इससे आने वाले लोगों को खासी दिक्कत होती थी। ऐसे में गेट से अंदर आने वाले वाहनों पर रोक लगा दी गई है। साथ ही, गेट पर एक स्ट्रेचर का इंतजाम किया गया है, जिससे शव को लाया, ले जाया जाएगा। शव को ले जाने वाले रास्ते को ग्रीन कारीडोर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिस पर अन्य लोगों के आने जाने व खड़े होने पर रोक रहेगी।
लाइटें भी लगेंगी, पेयजल व्यवस्था होगी
परिसर के अंदर अंधेरे को देखते हुए लाइट-पंखे लगाए जाएंगे, ताकि किसी तरह की समस्या न रहे। परिसर के अंदर ही स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था कराने की तैयारी की गई है।
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पोस्टमार्टम हाउस कानपुर
एनाउंसमेंट की होगी व्यवस्था, पढ़ाएंगे यातायात का पाठ
पोस्टमार्टम में अक्सर लोगों की भीड़ से दिनभर मारामारी की स्थिति रहती है। शव के साथ आने वाले परिवार वालों को बुलाने के लिए एनाउंसमेंट की व्यवस्था की गई है। लोगों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने के साथ ही हेलमेट लगाने और सीट वेल्ट लगाने की सीख दी जाएगी, ताकि हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या में कमी आ सके। इस संबंध में पोस्टमार्टम प्रभारी नवनीत चौधरी का कहना है कि वर्ष 2108 में 4089 शवों का पोस्टमार्टम हुआ है। इसमें 325 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई है।
इन्होंने शुरू की पहल
पोस्टमार्टम प्रभारी डॉ. नवनीत चौधरी, ईएमओ हैलट डॉ. अनुराग रजौरिया, सीएमओ कंट्रोल रूम अशीष श्रीवास्तव, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमित सिंह, हैलट ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. मनीष यादव, चीफ फार्मेसिस्ट दिलीप सचान, चीफ फार्मेसिस्ट विमल श्रीवास्तव आदि ने इसके लिए पहल शुरू की है।
शवों को रखने के लिए टीनशेड और आवारा जानवरों को पोस्टमार्टम हाउस के भीतर आने से रोकने के लिए बाउंड्री और दरवाजे लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। स्पीकर लगाकर तीमारदारों, पुलिस कर्मियों को बुलाने का काम शुरू हो गया है। इसके अलावा परिसर में पौधरोपण के लिए गमले लाए जा चुके हैं।
आगंतुकों की असुविधा देखते हुए जनहित में काम शुरू किया गया है। सुंदरीकरण में दो-तीन लाख रुपये का खर्च आंका गया है, इसकी मौखिक जानकारी सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला को दे दी गई है। - डॉ. नवनीत चौधरी, पोस्टमार्टम प्रभारी