युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं। मोबाइल भी ऑफ होने वाला है। अब रात में बात कर हालचाल लूंगा। फोन पर दीपक के ये आखिरी शब्द थे। बुधवार सुबह करीब छह बजे कानपुर के मंगला विहार चकेरी निवासी उसके दोस्त आकाश ने दीपक को फोन किया था। तब ये बातें हुई थीं। दोपहर बाद जब दीपक के शहीद होने की खबर आई तो आकाश सहित उसके अन्य दोस्त मिथुन, सागर और आदित्य को सदमा लग गया।
बिलखते परिजन
आकाश ने बताया कि जब से पुलवामा में हमला हुआ था, तबसे उसकी लगभग हर दिन दीपक से फोन पर बात होती थी। बुधवार सुबह छह बजे दीपक को उसने फोन किया था। आकाश के मुताबिक इस दौरान दीपक काफी जल्दी में था। इसलिए सिर्फ उसने यही कहा कि बार्डर पर हालात बिगड़ते जा रहे हैं। अब रात में बात करूंगा। दीपक के दोस्त उसकी फोटो देख-देखकर रोते रहे।
शहीद के घर के बाहर इकट्ठा भीड़
मां ने पूछा था, बेटा खाना खाया
मां रमा से दीपक की आखिरी बात मंगलवार रात साढ़े आठ बजे हुई थी। मां ने दीपक से पूछा था कि खाना खा लिया या नहीं। इस पर दीपक ने कहा था कि हां और आपने खाना खाया कि नहीं। मां बार-बार रोते हुए कह रहीं थी कि अब वह किससे कहेंगी कि बेटा खाना खाया।