टैक्स चोरी करने वालों पर आयकर विभाग आने वाले दिनों में और सख्ती करेगा। कालाधन रखने की मंशा साबित होने वाले लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। इस वित्तीय वर्ष में कानपुर क्षेत्रीय कार्यालय के अधीन आते क्षेत्र में 50 से अधिक लोगों पर आयकर अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है।
कानपुर में ऐसे छह लोग हैं। विभाग की तैयारियों से लग रहा है कि इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले इतने ही और लोगों पर मुकदमा दर्ज हो सकता है। अभी तक आयकर विभाग रकम सरेंडर कराकर और भविष्य में खाते दुरुस्त रखने की चेतावनी देकर मामले का निस्तारण कर देता था।
आयकर विभाग के सूत्र बताते हैं कि मुकदमा जैसी कार्रवाई के लिए अभी उन लोगों को चुना जा रहा है जो कदम कदम पर गलत पाए जा रहे हैं। मसलन उनका कर निर्धारण भी ठीक नहीं है, समय पर टैक्स भी जमा नहीं करते, छापा पड़ा तो बड़े पैमाने पर रकम भी सरेंडर हुई, नकदी, जेवरात और संपत्तियां मिलीं लेकिन उनका हिसाब नहीं दे पाए।
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इनकम डिक्लेरेशन स्कीम में भी उनकी सहभागिता नहीं रही। इसके अलावा नोटबंदी के दौरान उनके खातों में भारी भरकम रकम जमा हुई। जिस व्यक्ति के काम में इतनी तरह की गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, उनकी मंशा कालाधन को संरक्षण देने वाली मालूम पड़ती है।
इसलिए आयकर विभाग ऐसे लोगों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई भी करेगा। बिल्डर आनंद खत्री को मुकदमा चलाए जाने का नोटिस भेजे जाने के बाद आयकर विभाग की यह कार्रवाई सामने आई।
आयकर अधिकारी इससे पहले करीब छह लोगों पर मुकदमा दर्ज करा चुके हैं। हालांकि इनके नाम सामने नहीं आ सके। विभागीय सूत्र बताते हैं कि इस साल के अंत तक इतने ही लोगों पर मुकदमा कराने की तैयारी चल रही है। इनमें शहर के व्यापारी, होटल कारोबारी और उद्योगपति शामिल हैं।
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आयकर चला सकता है मुकदमा
यदि कोई व्यक्ति कालाधन रखने के बावजूद उसे स्वीकार नहीं करता है, अथवा आय से अधिक संपत्ति का हिसाब नहीं दे पाता है। कर चोरी में लिप्त रहता है अथवा कर चोरी करने वालों का साथ देता है तो उस पर आयकर विभाग अभियोजन चला सकता है।
अभियोजन चलाने से पहले प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त से अनुमति लेना जरूरी होता है। इस तरह का मुकदमा आयकर अधिनियम की धारा 276, 276(क), 277(क) आदि के तहत दर्ज होता है। इसमें छह महीने से सात साल तक सजा का प्रावधान है।