रोगियों को ट्रॉली पर रखकर इलाज देना पड़ता है
अभी सर्जरी के रोगियों के लिए 20 बेड की व्यवस्था रहती है। उन्होंने बताया कि सामान्य रोगियों के लिए दो तल अलग से होंगे। इससे सामान्य रोगियों को बेड मिलने में आसानी रहेगी। अभी सभी बेड शत प्रतिशत भरे रहते हैं। बेड खाली न रहने पर फौरी तौर पर रोगियों को ट्रॉली पर रखकर इलाज देना पड़ता है।
वित्तीय स्वीकृति मिलते ही हो जाएगा काम शुरू
वहीं, बहुत से रोगी ऐसे आते हैं जो प्राइवेट कक्ष चाहते हैं और इसका खर्च दे सकते हैं। उनके लिए भी आसानी हो जाएगी। अभी प्राइवेट कक्ष चाहने वाले रोगियों के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। नया भवन बनने से प्राइवेट कक्ष भी मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि वित्तीय स्वीकृति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।
दूसरे प्रदेशों से भी आते हैं रोगी
एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में कानपुर और आसपास के 17 जिलों के अलावा दूसरे प्रदेश के रोगी भी इलाज के लिए आते हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड आदि के प्रांतों के रोगी भी यहां इलाज के लिए आते हैं। इंस्टीट्यूट के बेड 20 सालों से शत-प्रतिशत भरे रहते हैं। हर साल ओपीडी और भर्ती होने वाले रोगी मिलाकर औसत पांच हजार रोगी बढ़ जाते हैं।
नए भवन में ये सूविधाएं स्थिति
- प्रथम, द्वितीय और तृतीय तल- जनरल वार्ड 150 बेड
- चौथे और पांचवें तल पर सर्जिकल आईसीयू- 100 बेड
- छठवें और सातवें तल पर प्राइवेट वार्ड- 50 बेड