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नए आई जी का स्वागत जाम से

Tue, 26 Jan 2016 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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नए आईजी ज़की अहमद का शहर आने पर पहले ही दिन यहां की सबसे बड़ी समस्या जाम से परिचय हो गया। ओईएफ गेस्ट हाउस से आईजी ऑफिस जाते समय वे माल रोड से लेकर आईजी ऑफिस तक जगह-जगह जाम में फंसे रहे।
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इसके बाद प्रेस वार्ता में उन्होंनेे कहा कि कानपुर के ट्रैफिक को सुधारने केलिए कार्ययोजना बनाई जाएगी। ज़की अहमद ने सोमवार को कानपुर जोन के आईजी का पद संभाला। इसके बाद सर्किट हाउस में प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं बताईं।

हर स्तर पर चेक होगी पुलिसिंग
ज़की अहमद ने बताया कि पुलिस नियमावली, आईपीसी, सीआरपीसी में हर अपराध के लिए एफआईआर की व्यवस्था है। जांच, गिरफ्तारी से लेकर एफआर (फाइनल रिपोर्ट) के लिए भी निर्देश हैं लेकिन कई मामलों में पुलिस निर्देशों का पालन नहीं करती है जिसकी वजह से परेशानी होती है। अब हर स्तर पर देखा जाएगा कि व्यवस्था के मुताबिक काम हो रहा है या नही। कहा कि उन्होंने कभी राजनैतिक दबाव महसूस नहीं किया और कभी हुआ भी तो स्वीकार नहीं किया।
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हर महीने क्राइम समीक्षा
उन्होंने कहा कि कानपुर जोन का सबसे बड़ा शहर है। यहां पर हर तरह के अपराध होते हैं। इसलिए अब शहर में होने वाले अपराधों की हर महीने समीक्षा होगी। इसमें देखा जाएगा कि पुलिस ने कैसा काम किया, कहां लापरवाही हुई और क्यों। इसकी जवाबदेही भी तय होगी। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की खास निगरानी की जाएगी। जोन में महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनको हल किया जाएगा। पुलिस को संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

चलता रहेगा ‘एक नंबर भरोसे का’
निवर्तमान आईजी आशुतोष पांडे द्वारा चलाए गए एक नंबर भरोसा का सहित सभी अभियानों को फिलहाल चलने दिया जाएगा। कुछ समय बाद इनकी समीक्षा होगी जिसके बाद सुविधाओं को घटाने- बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।

आईजी बनकर रहूंगा, एसएसपी बनकर नहीं
पिछले आईजी के साथ एसएसपी के संबंधों पर कुछ भी बोलने से बचते हुए आईजी ने कहा कि उनका काम सिर्फ एसएसपी को सपोर्ट देना है। एसएसपी को अपनी ड्यूटी मालूम है और जहां जरूरत होगी, वहां पर सुझाव दिया जाएगा। मैं आईजी हूं और आईजी बनकर ही काम करूंगा।

पहला पत्थर कानपुर में ही खाया
जकी अहमद 1993 में एएसपी कानपुर कैंट रहे हैं। अपनी तैनाती के 20 दिन बाद ही पुराने कानपुर में एक सांप्रदायिक संघर्ष हो गया था। उसदौरान उपद्रवियों का एक पत्थर ज़की अहमद के हाथ पर लगा था। वह वाकया उन्हें आज भी भी याद है। बोले, उठना-गिरना कानपुर से ही सीखा है। सांप्रदायिक दृष्टि से शहर संवेदनशील है जिससे निपटने के लिए कार्ययोजना बना कर काम किया जाएगा।
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प्रोफाइल
-1993 बैच के आईपीएस अफसर हैं
-पहली पोस्टिंग कानपुर में एएसपी कैंट के पद पर हुई थी
-कानपुर केबाद देवरिया, महोबा, बांदा और खीरी में एसपी रहे
-खीरी से नई दिल्ली सीबीआई में प्रतिनियुक्ति पर गए
-सीबीआई में ही डीआईजी बने
-यूपी वापसी पर आईजी बने
आईजी मेरठ, गोरखपुर, बरेली, लखनऊ रह चुके हैं
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