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नेपाली और बांग्लादेशी भी यहां की मिर्च के कायल

Mon, 30 Oct 2017 08:53 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
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फतेहपुर औंग इलाके की मिर्ची का स्वाद देश प्रदेश ही नहीं विदेश की मंडियों तक पहुंच चुका है। इस मिर्ची का जायका इतना भा रहा कि दिन-ब-दिन इसकी मांग बढ़ती जा रही है। औंग मंडी से हर रोज कम से कम आठ हजार बोरी मिर्ची का निर्यात हो रहा है। तीखे स्वाद वाली इस मिर्च के कारोबार से सरकार को प्रतिदिन सवा लाख के आसपास राजस्व मिल रहा है। 
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बिंदकी तहसील के देवमई और मलवां ब्लाक सब्जी उत्पादक क्षेत्र हैं। गुनीर, पहुर, शाहजहांपुर, करचलपुर, बनियनखेड़ा, लोधनपुरवा  गंचौली सहित कटरी के दो दर्जन से ज्यादा गांवों में मिर्च की खेती बड़े पैमाने पर होती है। मिर्च की पैदावार अक्तूबर से जनवरी तक होती है। इन गांवों की मिर्च औंग की मंडी में आती है। यही से इसका निर्यात होता है। गोरखपुर, बस्ती, खलीलाबाद, लखनऊ, जौनपुर, आजमगढ़, सुल्तानपुर, गाजियाबाद, रायबरेली, गोंडा व बाराबंकी की मंडियों में इसकी खासी डिमांड है। इसके अलावा दिल्ली, बंगाल, बिहार, पंजाब से लेकर बांग्लादेश और नेपाल तक यहां की मिर्च जा रही है। 


सुविधा के नाम पर कुछ नहीं
मिर्च का इतना बड़ा निर्यात करने वाली मंडी नेशनल हाईवे पर सजती है। रोजाना सवा लाख रुपये का राजस्व अदा करने वाले इस कारोबार को अभी तक मुफीद ठिकाना नहीं मिल सका है। औंग कस्बे के पूती सिंह, धर्मेंद्र कुमार, अजय कुमार पटेल, दिलशाद खान, मुन्ना खान, पुल्लू पांडेय का कहना है कि असुरक्षा के बीच धंधा किया जा रहा है। सालाना एक करोड़ के आसपास राजस्व दिया जाता है। इसके बदल में उन्हें न तो सुविधा मिल रही है और न ही सुरक्षा।  
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पहले टमाटर उत्पादन में थी पहचान
एक दशक पहले यह मंडी टमाटर के लिए जानी जाती है। यहां से टमाटर दूर दराज तक जाता था। इधर चार-पांच साल से यह मंडी मिर्च के लिए जानी जा रही है। मिर्च महंगी होने पर बाजार में खपती है, जबकि सस्ती होने पर अचार और चिली बनाने के काम आती है। दिल्ली या अन्य प्रांतों में कांटेक्टर के जरिये उद्योगपति खरीदते हैं।
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