कानपुर हैलट रेफर किया था
परिजन दवा लिखवाकर उसे घर लेकर चले गए थे। दो मार्च को सांस लेने में तकलीफ होने पर उसे दोबारा एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया था। तब से इलाज चल रहा था। पांच मार्च को बच्चे की हालत फिर बिगड़ी उसका कानपुर हैलट का रेफर बनाया गया।
परिजनों का आरोप- इलाज में लापरवाही
फिर परिजनों ने ले जाने से इनकार किया और यही भर्ती रखने की बात कही। मंगलवार सुबह मां बच्चे को दूध पिला रही थी। दूध पिलाते समय बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हुई और सुबह 11:30 बजे उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत पर परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगा हंगामा किया।
सीएमओ बोले- नहीं मिले हैं जलने के निशान
यही नहीं वार्मर मशीन जलने की बात कही। नवजात की मौत पर हंगामें की सूचना पर पहुंचे सीएमओ ने जांच की। न ही मशीन जली मिली और न ही बच्चे के शरीर पर दाग मिला। वार्ड में रहीं डॉ. निधि से हुए इलाज की जानकारी ली, तो पता चला कि उसे सांस लेने में तकलीफ थी। रेफर भी बना रखा था, लेकिन परिजन नहीं ले गए थे।
मशीन भी सही निकली
सीएमओ के समझाने के बाद परिजन माने और शव लेकर घर चले गए। यह उनका दूसरा बच्चा था। सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि नवजात की मौत मामले में जांच की गई है। सांस लेने में तकलीफ होने से उसकी मौत हुई है। जिस मशीन पर बच्चा था वह परिजनों के सामने चेक की गई कहीं भी वह जली नहीं मिली।