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Kanpur News: चिड़ियाघर प्रशासन की लापरवाही ने रोक दी सैकड़ाें मछलियों की सांस

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कानपुर। चिड़ियाघर प्रशासन की लापरवाही ने सैकड़ों मछलियों की सांस रोक दी। झील की समय रहते सफाई न होने और जलकुंभी की मोटी परत के कारण ऑक्सीजन की कमी से सैकड़ों मछलियों की मौत हो गई। नाव से 30 से अधिक मृत मछलियों को बाहर निकाल कर दफना दिया।
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मोतीझील में अंग्रेजों के जमाने की झील में मछलियां पाली जाती हैं। यहां हर वर्ष बारिश से पहले फैली जलकुंभी और अन्य जलीय खरपतवार की सफाई कराई जाती थी ताकि पानी में पर्याप्त ऑक्सीजन बनी रहे। इस बार जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि जलकुंभी ने पानी की सतह को पूरी तरह ढक लिया और ऑक्सीजन का स्तर घटने से मछलियां मरने लगीं। झील के आसपास मांसाहारी पक्षी मृत मछलियों को खाते देख कीपरों ने जानकारी चिड़ियाघर प्रबंधन को दी। इस पर पानी में उतराती दिख रहीं मृत मछलियों को तुंरत नाव से बाहर निकाला गया। अन्य मछलियों को बचाने के लिए चिड़ियाघर के डॉक्टरों ने झील में 25 किलो ओटू मैक्स टैबलेट और 40 किलो टॉक्सिन बाइंडर दवा का घोल डाला। ओटू मैक्स टैबलेट पानी में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने और टॉक्सिन बाइंडर विषैले तत्वों के प्रभाव को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में आशंका है कि झील के आसपास खड़ी कंटीली झाड़ियों और जलकुंभी के नीचे अभी भी बड़ी संख्या में मछलियों के शव पड़े हो सकते हैं। इससे पानी प्रदूषित हो रहा है।


वॉच टॉवर का रास्ता किया बंद
बीट प्रभारियों ने बब्बर शेर के बाड़े के पास झील किनारे बने वॉच टॉवर तक जाने वाले रास्ते को बड़ी लकड़ी और कंटीली डालियां रखकर बंद कर दिया है। इससे झील में मरी मछलियों और वहां की वास्तविक स्थिति की जानकारी किसी के पास न पहुंच सके।
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वर्कशाप की गंदगी को बताया खतरनाक
चिड़ियाघर के रेंजर फिरोज खान ने बताया कि रोडवेज वर्कशाप में बसों की सर्विस होती है। उससे काला मोबिलऑयल और डीजल निकलता है जो पीछे बने नाले में बहाया जाता है। उस नाले का पानी अभी भी झील में आता है। बारिश में वही पानी इस झील में पहुंचा जिसके बाद ऑक्सीजन की कमी हुई है। इस नाले को बंद कराने के लिए नगर आयुक्त को पत्र लिखा है।
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