कानपुर शहर के सबसे आलीशान पिकनिक स्पॉट मोतीझील की दोनों झीलें सूखने के पीछे नगर निगम अफसरों की काहिली सामने आई है। झीलों में पानी जाने के लिए जलनिगम ने लोअर गंगा कैनाल से मोतीझील होते हुए बेनाझावर वॉटर वर्क्स तक जाने वाली पाइप लाइन में वॉल्व लगाए थे। इससे दोनों झीलों को कनेक्ट किया गया था, ताकि समय-समय पर इन वॉल्वों को ढीला कर जरूरत के हिसाब से मोतीझील में पानी भरा जा सके।
नगर निगम के अफसर जुलाई 2016 से वॉल्व ढीला कराकर झीलों में पानी भी नहीं भरवा सके। खास बात यह कि नगर निगम मुख्यालय और नगर आयुक्त का बंगला भी मोतीझील में ही है फिर भी सब आंखें मूंदे रहे। ‘अमर उजाला’ में ‘अफसरों ने ही सुखा डाली मोतीझील’ खबर छपते ही शुक्रवार को वहां लगे पाइप लाइन का वॉल्व खोला गया और स्वरूप नगर की तरफ स्थित झील में पानी भरवाया जाना लगा।
लोअर गंगा कैनाल, पनकी से पहले मोतीझील की दोनों झीलों में पानी भरा जाता था और वहां से पानी बेनाझावर वाटर वर्क्स जाता था। जलनिगम ने जलापूर्ति परियोजना के तहत इस नहर के साथ ही मोतीझील में भी पाइप डाल दिए। पिछले साल जुलाई से इन्हीं पाइपों से नहर से बेनाझाबर में पानी जाने लगा। जलनिगम ने शहर के प्रमुख पिकनिक स्पॉट मोतीझील में पानी भरने के लिए पाइपों में वाल्व लगा दिए, परंतु नगर निगम के लापरवाह अफसरों ने इन वाल्वों को कभी नहीं खुलवाया।
नतीजतन अशोक नगर तरफ की झील सूख गई और स्वरूप नगर तरफ की झील में पानी कम होने से मछलियां मरने लगीं थीं। शुक्रवार को सुबह उद्यान अधीक्षक वीके सिंह मोतीझील पहुंचे और उन्होंने वॉल्व की चूड़ी ढीली कराईं। नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि यह घोर लापरवाही है। उद्यान अधीक्षक और जलकल महाप्रबंधक से बात करता हूं। दोनों झीलों में पानी भरा जाएगा। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।