डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ सभागार में गोष्ठी का आयोजन
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अनुच्छेद 370 और 35 ए को कभी भी संसद में रखा नहीं गया और न ही इसकी कभी मंजूरी ली गई। इस अनुच्छेद ने जम्मू कश्मीर में दलितों के अधिकार छीन लिए हैं। दलित के बच्चों को घर बनाने, सरकारी नौकरी करने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का अधिकार नही है। यहां तक की शिक्षा के अधिकार से भी वंचित रखा गया है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता डीके दुबे का मानना है कि अनुच्छेद 370 और 35 ए में बदलाव की आवश्यकता है।
जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र कानपुर प्रांत की ओर से शुक्रवार को यूपी के कानपुर के सिविल लाइंस स्थित डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ सभागार में गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने अनुच्छेद 370 और 35 ए में बदलाव पर जोर दिया। मुख्य वक्ता व दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता डीके दुबे ने कहा कि इस अनुच्छेद को कभी भी संसद में रखा नहीं गया और न ही इसकी कभी मंजूरी ली गई। अब समय आ गया कि सभी को एकजुट होकर इस भेदभाव को खत्म करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 में भी कई प्रकार की समस्याएं हैं। अधिवक्ता आशुतोष त्रिपाठी ने कहा कि अनुच्छेद 35 ए पर सभी को एक जुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है। इस मौके पर ज्ञानेंद्र सिंह सचान, डॉ. यतींद्र सिंह, बीडी पांडेय, अरुण कुमार सिंह, सर्वेश बाजपेई, वेतन, अमित बाथम आदि मौजूद थे।