कानपुर। विधि विभाग में अब रियल टाइम लॉ मेकिंग की जरूरत है। अपराधी डिजिटल फ्रॉड में तकनीकी का इस्तेमाल बढ़ रहा है, इसलिए पुलिस और विधि प्रक्रिया में अत्याधुनिक तकनीक को शामिल करना जरूरी है। यह बात छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज की ओर से सीनेट हाॅल में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विधि व साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञों ने कही।
शुभारंभ स्कूल की निदेशक डॉ. स्मृति रॉय ने किया। उन्होंने कहा कि तकनीक और विधि के समन्वय से ही सशक्त विधिक व्यवस्था संभव है। राजीव गांधी नेशनल साइबर लॉ सेंटर एनएलआईयू भोपाल के प्रो. अतुल कुमार पांडेय ने कहा कि साइबर स्पेस लगातार विकसित हो रहा है, इसलिए विधि को भी तकनीक के अनुरूप लचीला बनाना होगा। डॉ. शशिकांत त्रिपाठी ने कहा कि साइबर सुरक्षा में सरकार, निजी क्षेत्र और शोध संस्थानों के बीच सहयोग से ही प्रभावी सुरक्षा तंत्र बनेगा। विभाग के सहायक निदेशक डॉ. दिव्यांश शुक्ला, आईआईटी कानपुर के सी3आई हब से जुड़े डॉ. आनंद हांडा, प्रो. संदीप त्रिपाठी, विधि कटियार ने विचार रखे।