पोस्टमार्टम हाउस में मृतक खुशी के दुखी परिजन
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कानपुर। नवाबगंज में 24 फीट गहरे गड्ढे में गिरकर बच्ची खुशी की मौत के बाद प्रथम दृष्टया एचबीटीआई की गर्दन फंसती नजर आ रही है। केडीए की शुरुआती जांच में भी एचबीटीआई को कटघरे मेें खड़ा किया गया है। सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो. सुनील कुमार ने केडीए और विभागीय शिक्षक डॉ. प्रदीप कुमार के बीच हुए पत्राचार की जानकारी एचबीटीआई निदेशक प्रो. डीबी शाक्यवार को दी है। इसमें कहा गया है कि शिक्षक ने ही गड्ढा खुदाई की एजेंसी नामित की और मिट्टी की सैंपलिंग कराई। इस वक्त संबंधित शिक्षक कानपुर में नहीं है, इसलिए गड्ढा बंद न कराने की जानकारी नहीं दी जा सकती है।
सोमवार को केडीए उपाध्यक्ष का आदेश मिलते ही अधीक्षण अभियंता सरवत अली ने जांच शुरू कर दी। सबसे पहले उन्होंने सिग्नेचर सिटी के लिए मिट्टी के परीक्षण से संबंधित फाइल जोन-1 के अधिशासी अभियंता मनोज मिश्रा से मंगाकर कब्जे में ली। उसकी पड़ताल शुरू की। जांच अधिकारी ने बताया कि मिट्टी परीक्षण का काम एचबीटीआई से कराया गया और उन्हें ही पूरा भुगतान एडवांस में किया गया। एचबीटीआई के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर प्रदीप कुमार ने काम शुरू करने से पहले लिखकर दिया है कि पूरी जिम्मेदारी उनकी है। यह भी लिखा है कि वह अपनी जिम्मेदारी में यह काम वेनटैक इंजीनियरिंग कंपनी से करा रहे हैं। बकौल जांच अधिकारी गड्ढे (टेस्ट बोर) खुदवाने से लेकर मिट्टी के नमूने लेने, परीक्षण करने, गड्ढे पाटने और जांच कर रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी एचबीटीआई की ही है।
उधर, केडीए के अधिशासी अभियंता मनोज मिश्रा और सहायक अभियंता अजित कुमार ने इस मामले में एचबीटीआई के निदेशक प्रोफेसर डीबी शाक्यवार से मुलाकात की। निदेशक ने बाहर गए सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर प्रदीप कुमार को मेल कराकर तत्काल तलब किया। बताया कि विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार से कंसल्टेंसी की रिपोर्ट मांगी गई थी। इस रिपोर्ट में केडीए और डॉ. प्रदीप कुमार के बीच हुए पत्राचार की जानकारी दी गई है। विभागाध्यक्ष ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एचबीटीआई ने मिट्टी सैंपलिंग की जानकारी ली थी। गड्ढा खुदाई की एजेंसी वेनटैक इंजीनियरिंग को भी एचबीटीआई ने नामित किया था। निदेशक ने कहा है कि रिपोर्ट बनाकर वे केडीए और डीएम को देंगे।