राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा झा
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा झा ने कहा आयोग तीन तलाक के खिलाफ है। आयोग किसी की धार्मिक मान्यताओं में दखल नहीं देना चाहता लेकिन महिलाओं से जुड़े मुद्दों का संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगा। दो दिवसीय विशेष सुनवाई के दौरान आयोग की सदस्य ने 40 से ज्यादा मामलों को सुना जिनमें से 31 मामलों का निस्तारण किया गया।
राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा झा दो दिवसीय विशेष सुनवाई के लिए कानपुर पुलिस लाइन में आईं थीं। बुधवार को सुनवाई की समाप्ति के समय उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग महिला अधिकारों के प्रति समर्पित संवैधानिक संस्था है। इसलिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि महिला किस धार्मिक परिवेश से आती है। उसके अधिकार क्षेत्र में कोई भी दखल नहीं दे सकता है। उन्होंने बताया कि आयोग तीन तलाक के खिलाफ है। आयोग इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए है।
यह पूछे जाने पर क्या राष्ट्रीय महिला आयोग कामन सिविल कोड (तीन तलाक इसमें शामिल है)पर विधि आयोग द्वारा बनाई गई प्रश्नावली पर महिलाओं की रायशुमारी में सहयोग करेगा पर उन्होंने कहा कि महिला आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसकी सीमायें तय हैं। कामन सिविल कोड में शामिल तीन तलाक के मुद्दे पर आयोग अपना रुख स्पष्ट कर चुका है।
महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश को पूरे देश में सबसे आगे बताते हुए कहा कि यूपी पुलिस महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में असंवेदनशीलता बरतती है। पुलिस पर कार्रवाई के बाबत पूछने पर बताया उन्होंने कई मामलों की समीक्षा कर पुलिस को उनके निस्तारण का समय दिया है। समय पर निस्तारण न होने पर पुलिस पर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।