सेना की वर्दी तक पहुंच बनाने में सामान्य युवा की अपेक्षा खिलाड़ी या एनसीसी सी सर्टिफिकेट धारक जल्द कामयाब होते हैं, बशर्ते उनमें जज्बा व जुनून दोनों होना चाहिए।   हरदोई जिले के युवाओंं तक सेना की जानकारी पहुंचना और उनके अंदर की जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए तीसरे दिन भी कुमायुं रेजीमेंट के जवान जिले में मौजूद रहे। आईए जानते हैं उन्होंने छात्रों को क्या जानकारी दी...  एनसीसी यानी नेशनल कैडेट कोर। स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी की राह ढूंढ़ना चाहते हैं तो इसका एक रास्ता एनसीसी से होकर जाता है। एनसीसी यानी नेशनल कैडेट कोर, जो कॉलेज के अनुशासित और देशभक्त युवाओं को भविष्य के लिए नेतृत्व प्रदान करता है। यह सेना के तीनों अंगों को आगे चलकर अपने हुनर और कुशल प्रशिक्षण से मजबूती प्रदान करते हैं।     इससे आप स्नातक से पहले से भी जुड़ सकते हैं और यदि आपने एक भी कैंप में भागीदारी निभाई तो आप इससे संबंधित सर्टिफिकेट पा सकते हैं। यदि आपके पास एनसीसी का ‘सी’ सर्टिफिकेट है तो आप जहां भारतीय विश्वविद्यालयों और संस्थानों में उच्च अध्ययन के लिए छूट पा सकते हैं वहीं सेना की विभिन्न शाखाओं में नौकरी में भी आपको कई तरह की छूट मिल सकती है। कोर्स किस तरह का एनसीसी में शामिल होने पर साल भर के अंदर कॉलेज में इसके लिए अलग से क्लास होती है। एक सप्ताह में 40 मिनट की छह क्लास होती हैं। साल में 120 पीरियड करने होते हैं । एनसीसी में शामिल होने के लिए छात्रों को मेडिकल स्तर पर फिट होना चाहिए। एनसीसी में छात्रों को क्लास के दौरान ड्रिल पढ़ाया जाता है। इसमें उन्हें अनेक शारीरिक तरह के अभ्यास से गुजरना होता है। उन्हें फील्ड क्राफ्ट जैसे समाज सेवा, मैन मैनेजमेंट, मैप रीडिंग, राइफल खोलना, जोड़ना व उसके कलपुज्रे के बारे में अवगत कराया जाता है। इस तरह के ड्रिल कराकर उनमें नेतृत्व का गुण भी पैदा किया जाता है। पहले साल के बाद दूसरे साल में छात्रों में गंभीरता और अभ्यास में गहनता आ जाती है। स्कूल स्तर पर इससे जुड़े जो भी कार्य कराए जाते हैं, वे मोटिवेशनल होते हैं। उसका करियर के लिहाज से कोई फायदा नहीं है। हां, एक फायदा है, अगर स्कूल में एनसीसी में सक्रिय रहे या ‘ए’ सर्टिफिकेट धारक हैं तो उच्च शिक्षा के लिए कुछ संस्थानों में दाखिले के दौरान अलग से कोटा निर्धारित होता है। जैसे जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में इन्हें तवज्जो दी जाती है। दाखिले के दौरान स्नातक में इंजीनियरिंग कोर्स को छोड़कर अन्य सभी कोर्स में पांच फीसद रियायत दी जाती है। अगर किसी कोर्स में 50 फीसद पर दाखिला हो रहा है तो वहां ऐसे छात्रों को 45 फीसद पर दाखिला मिलता है। ‘बी’ और ‘सी’वाले को पोस्ट ग्रेजुएशन में रियायत मिलती है। शनिवार को रेजीमेंट के हवलदार मोहम्मद शाहिद व नायक प्रकाश चंद्र ने स्पोर्ट स्टेडियम में पहुंचकर खिलाड़ियों को भारतीय सेना के बाबत यह जानकारी दी। उन्होंने खासतौर पर खिलाड़ियों को उनके जिलास्तरीय, राज्यस्तरीय एवं राष्ट्रीयस्तर के खेल प्रमाण पत्रों की सेना में अहमियत के बारे में बताया। हवलदार ने खिलाड़ियों को जानकारी देते हुए बताया कि एनसीसी सी सर्टिफिकेट यदि किसी के पास है तो एनडीए व सीडीएस जैसी सेना भर्ती की परीक्षाओं में वह सामान्य आवेदकों से आगे निकल सकते हैं।  सेना एनसीसी के बी व सी सर्टिफिकेट को भर्ती में वरीयता देती है। इसी तरह खेल की भी अपनी खास महत्ता है। खिलाड़ियों के लिए तो सेना में अलग से रिक्तियां निकलती हैं। इनके अलावा खिलाड़ियों की अभी की मेहनत को भी भारतीय सेना जाया नहीं होने देती। जिलास्तर के खिलाड़ियों को भर्ती के दौरान पांच अंक, राज्यस्तर के खिलाड़ियों को सात अंक एवं राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को 10 अंक दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि सेना में भर्ती के लिए खिलाड़ियों का अधिकांश काम प्रमाणपत्र कर देता है, बाकी कार्य उनके जुनून व जज्बे को करना होता है। इस दौरान खिलाड़ियों ने उनसे प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं को भी शांत किया।