21 सितंबर से नवरात्र की शुरुआत के मद्देनजर बुधवार को देवी मंदिरों से लेकर लोगों ने घरों में विशेष रूप से साफ - सफाई कर कलश स्थापना की तैयारियां कीं। सीएम योगी के निर्देश के बाद मंदिर में 3 शिफ्टों में साफ-सफाई, सुरक्षा और बिजली व्यवस्था सुचारु रूप से चलाने के लिए ड्यूटियां लगाई हैं। अन्य देवी मंदिरों में भी विशेष रूप से साफ - सफाई के निर्देश दिए गए हैं।
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भारतीय संस्कृति में शक्ति पूजन (नवरात्र) का विशेष महत्व है
पंडित दीपक पांडेय के अनुसार इस नवरात्रि में मां दुर्गा को विशेष प्रकार के नैवेद्य से प्रसन्न कर सकते हैं। आरोग्य प्राप्ति के लिए घी, आयुष्य के लिए चीनी, दुख निवारण के लिए खीर, सुख - समृद्धि प्राप्ति के लिए मालपुआ, शारीरिक पुष्टि के लिए केले, आकर्षण के लिए शहद, शोक मुक्ति के लिए गुड़, संतान सुख में वृद्धि के लिए नारियल, भयमुक्ति के लिए गंगाजल अर्पित करें। मां की उपासना कर गृहदोष भी दूर किया जा सकता है। भारतीय संस्कृति में शक्ति पूजन (नवरात्र) का विशेष महत्व है।
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इनकी उत्पत्ति महाकाली, महा सरस्वती, महालक्ष्मी के सम्मिलत रूप में हुई
शक्ति के रूप में किसी न किसी देवी के रूप में उपासना शुरू हो गई थी। रामायण, महाभारत आदि में होती हुई शक्ति उपासना लौकिक साहित्य में समाहित हो गई। आगम और निगम दोनों में ही शक्ति उपासना का विशेष महत्व है। नवरात्र में शक्ति के विशेष रूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री) का पूजन किया जाता है। मां दुर्गा को अंबिका के रूप में जाना जाता है। इनकी उत्पत्ति महाकाली, महा सरस्वती, महालक्ष्मी के सम्मिलत रूप में हुई है। दुर्गम नामक महा दैत्य का वध करने के कारण इन्हें दुर्गा कहा जाता है।
दुर्गम नामक महा दैत्य का वध करने के कारण इन्हें दुर्गा कहा जाता है
इस समय करें कलश स्थापना
प्रथम कलश स्थापना समय - प्रात: 5:59 बजे से सुबह 8:55 बजे
द्वितीय कलश स्थापना समय - सुबह 11:34 बजे से दोपहर 12:34 बजे
तृतीय कलश स्थापना समय - दोपहर 12:21 बजे से 2:26 बजे तक