जूही स्थित प्राचीन सिद्धपीठ मां बारा देवी मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। मंदिर का इतिहास 12 बहनों से जुड़ा है। नवरात्र में यहां मां के जयकारों के बीच भक्तों का सैलाब उमड़ता है। मान्यता है कि मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है। भक्त प्रतिमा की पीठ की तरफ ईंट के नीचे धनराशि रखकर उसके ऊपर चुनरी, प्रसाद और नारियल चढ़ाते हैं।
नवरात्र में सुबह चार बजे मंगला आरती, हवन-पूजन और 51 किलो जलेबी का भोग लगाया जाता है। पहले कन्या भोज होता है फिर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण के बाद दर्शन शुरू होते हैं। मां बारा देवी जीर्णोद्धार एवं रखरखाव समिति के अध्यक्ष पूर्व विधायक सतीश निगम के अनुसार मान्यता है कि 12 बहनें घर छोड़कर इस स्थान पर आई थीं और यहीं मूर्ति के रूप में स्थापित हो गईं। तभी से यह स्थान बारा देवी के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
समिति की प्रबंधक रूपम शर्मा ने बताया कि मंदिर की देखरेख समिति करती है जबकि गर्भगृह की जिम्मेदारी चार माली परिवारों के पास है। दानपात्र की राशि मंदिर के निर्माण और रखरखाव में खर्च होती है। मंदिर परिसर किदवईनगर और मेला स्थल जूही थाना क्षेत्र में आता है।