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Kanpur News: प्राकृतिक तरीके से बने अणु रोकेंगे स्तन कैंसर की कोशिकाएं

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कानपुर। महिलाओं में होने वाले विशेष तरह के ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर के इलाज की उम्मीद जगी है। पीपीएन डिग्री कॉलेज के दो प्रोफेसर प्राकृतिक स्रोतों से औषधीय गुणों वाले पदार्थों से ऐसे मॉलिक्यूल (अणु) तैयार करने जा रहे हैं, जिनसे कैंसर कोशिकाओं को अधिक प्रभावी तरीके से रोकने में मदद मिलेगी। यह अणु महिलाओं में पाए जाने वाले एस्ट्राडियोल की संरचना में बदलाव कर विकसित किए जाएंगे। शोध के लिए उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से 16 लाख रुपये का प्रोजेक्ट मिला है।
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पीपीएन डिग्री कॉलेज के केमिस्ट्री विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. यशवीर गौतम और जूलॉजी विभाग के डॉ. नीरज वर्मा कर रहे हैं। डॉ. गौतम ने शोध कार्य सीएसआईआर-सीमैप लखनऊ और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से किया है। उनका विशेष फोकस ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर है। इसका इलाज अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है। सामान्य हार्मोन आधारित दवाएं असर नहीं करतीं।
शोध के तहत वैज्ञानिक एस्ट्राडियोल (महिलाओं में पाया जाने वाला सबसे मुख्य और शक्तिशाली एस्ट्रोजन हार्मोन) की संरचना में बदलाव कर ऐसे नए अणु विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिनमें दोहरी क्षमता हो। पहला वे कैंसर को बढ़ाने वाले हार्मोन के प्रभाव को रोकें और दूसरा सीधे कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करें। इन अणुओं को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि वे कैंसर कोशिकाओं के विभाजन की प्रक्रिया को भी रोक दें, जिससे उनका फैलाव धीमा हो सके। यदि यह शोध सफल होता है तो भविष्य में स्तन कैंसर, विशेष रूप से ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर के लिए नई और अधिक प्रभावी दवाओं के विकास का रास्ता खुल सकता है। यह शोध अभी प्रारंभिक वैज्ञानिक चरण में है। इसका उद्देश्य नई संभावित दवाओं के लिए आधार तैयार करना है।
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डॉ. गौतम के कैंसररोधी शोध पर अब तक दो पेटेंट मिल चुके हैं। एक पेटेंट आवेदन विचाराधीन है। उनके शोध कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। वे एल्सेवियर और स्प्रिंगर नेचर जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशन समूहों की शोध पत्रिकाओं के समीक्षक भी हैं।
परियोजना में जूलॉजी विज्ञान विभाग के डॉ. नीरज वर्मा सह-अन्वेषक के रूप में जुड़े हैं। वह प्रयोगशाला में यह जांच करेंगे कि विकसित किए गए नए अणु कैंसर कोशिकाओं पर कितने प्रभावी हैं। डॉ. गौतम ने बताया कि शोध में कम्प्यूटेशनल ड्रग डिजाइन, मॉलिक्यूलर मॉडलिंग, रासायनिक संश्लेषण और जैविक परीक्षण जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
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