कानपुरः बसपा के कद्दावर नेता रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी के जरिए कांग्रेस ने मुस्लिमों को एकजुट करने की मंसूबा बनाया है। सिद्दीकी को पार्टी में लाने की मुख्य वजह उनकी कई जिलों के मुस्लिमों में अच्छी पकड़ मानी जा रही है। कांग्रेसियों को लोकसभा चुनाव में सिद्दीकी के प्रभाव का फायदा मिलने की उम्मीद है। बुधवार को सिद्दीकी दिल्ली पहुंच चुके हैं। उनके साथ शहर से लोकसभा चुनाव लड़ चुके सलीम अहमद समेत आसपास के जिलों के कई कार्यकर्ता भी दिल्ली गए हैं।
बसपा में रहते हुए सिद्दीकी ने बुंदेलखंड, इलाहाबाद, कानपुर, हमीरपुर, बांदा, लखीमपुर खीरी आदि जिलों के मुस्लिमों और बसपा के परंपरागत दलित मतदाताओं के बीच गहरी पकड़ बनाई। यह सभी जिले भाजपा के मध्य क्षेत्र में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में सिद्दीकी के जरिए कांग्रेस ने दलित-मुस्लिम मतों का बिखराव रोकने की तैयारी की है।
कयास लगाए जा रहे हैं कि सिद्दीकी को पार्टी प्रदेश की राजनीति में अपना मुस्लिम चेहरा बनाएगी। बृहस्पतिवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में सिद्दीकी को पार्टी की सदस्यता दिलाई जाएगी। इस दौरान बड़ी संख्या में अन्य बसपा नेता भी कांग्रेस की सदस्यता लेंगे।