इसमें उल्लेख है कि वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और लोकतांत्रिक कांग्रेस के बीच गठबंधन था। इसके तहत हरदोई, मिश्रिख, कन्नौज और मुरादाबाद सीट लोकतांत्रिक कांग्रेस को मिली थी। कन्नौज से मुलायम सिंह यादव चुनाव लड़ रहे थे और उनके खिलाफ लोकतांत्रिक कांग्रेस ने अरविंद प्रताप को मैदान में उतारा। दूसरी सीट से भी चुनाव जीत जाने के कारण बाद में मुलायम सिंह यादव ने कन्नौज सीट से इस्तीफा दे दिया।
अटल बिहारी वाजपेयी से कन्नौज सीट से प्रत्याशी उतारने से इनकार कर दिया
उपचुनाव की घोषणा हुई और साल 2000 में चुनावी तैयारी शुरू हो गई। किताब में दावा है कि तब के ऊर्जा मंत्री नरेश अग्रवाल को पता चला कि इस सीट से मुलायम सिंह अब अखिलेश यादव को लड़ाना चाहते हैं। इसके चलते नरेश अग्रवाल ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से कन्नौज सीट से प्रत्याशी उतारने से इंकार कर दिया।
सीट तुम्हें लेनी है और किसी ब्राह्मण को चुनाव लड़ा दो
इसका पता मुलायम सिंह यादव को चला, तो उन्होंने फोन कर पूछा कि नरेश क्या तुमने कन्नौज की सीट छोड़ दी है। हां का जवाब मिलने पर मुलायम सिंह यादव ने कहा कि सीट तुम्हें लेनी है और किसी ब्राह्मण को चुनाव लड़ा दो। असमंजस के बीच नरेश अग्रवाल के फिर से अटल जी से मिलने और कन्नौज सीट मांगकर यहां से प्रतिमा चतुर्वेदी को चुनाव लड़ाने का उल्लेख भी किताब में किया गया है।
भाजपा के लोगों ने एक तरह से असहयोग कर दिया था
किताब में जिक्र है कि प्रतिमा चतुर्वेदी को चुनाव लड़ाने की घोषणा की गई। नामांकन के बाद प्रचार शुरू हुई, लेकिन भाजपा के दिग्गज नेता राम प्रकाश त्रिपाठी के नेतृत्व में भाजपा के लोगों ने एक तरीके से असहयोग कर दिया। उक्त चुनाव में बसपा ने अकबर अहमद डंपी को मैदान में उतारा था। किताब में एक और किस्से का जिक्र करते हुए नरेश अग्रवाल ने दावा किया है कि उक्त चुनाव में अधिकांश मुस्लिम मतदाताओं ने डंपी को वोट दिया था, लेकिन अखिलेश यादव जीतने में कामयाब रहे।