पूत के पांव पालने में ही दिखने लगते हैं, यह कहावत चित्रकूट के आयुष्मान पर सही बैठती है। आयुष्मान ने 14 साल की उम्र में ही देश भर में मूर्ति कला के क्षेत्र में अपने नाम का झंडा गाड़ दिया है। उसने दो मिनट में डेढ़ सेंटीमीटर की मिट्टी की गणेशजी की मूर्ति बनाने का कारनामा किया है।
इसके चलते आयुष्मान का इंडिया बुक्स ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज किया गया है। शहर के पुरानी बाजार निवासी दयाराम रिछारिया का पुत्र आयुष्मान 9वीं का छात्र है। 10 साल की उम्र से ही उसे मिट्टी की मूर्तियां बनाने में रुचि है।
वह अक्सर घर के गमलों व गुलदस्तों की मिट्टी को निकालकर उससे मूर्ति बनाने का प्रयोग करता तो उसे माता पिता डांट देते थे। मूर्ति कला के प्रति उसके बढ़ते प्रेम को देखते हुए मां माधुरी देवी उसे मिट्टी के बर्तन बनाने वालों के पास ले गई।
वहां आयुष्मान ने घर वालों को मूर्तियां बनाकर दिखाईं। इस पर परिजन उसे घर में ही मिट्टी लाकर देने लगे और आयुष्मान पढ़ाई के साथ-साथ मूर्ति बनाने का भी प्रयास करता रहा। लॉकडाउन के दौरान उसने अपनी कला को और निखारा।