फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेरा तो हर दिन वैलेंटाइन डे होता है जब बेटी करती है नीदरलैंड से फोन, कहते-कहते छलकने लगे आंसू

Tue, 12 Feb 2019 05:16 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
शालिनी की सिंदूर से मांग भरते नीदरलैंड निवासी साइमन
विज्ञापन
हरदोई शहर के घंटाघर रोड निवासी वाईपी गुप्ता के लिए हर दिन वैलेंटाइन डे होता है, जब उनकी बेटी नीदरलैंड से लंच से पहले फोन कर उनका हालचाल लेती है। वैलेंटाइन डे पर रोज डे वाले दिन तो बेटी के विवाह का सीन सामने आ जाता है। वह बताते हैं कि बरीक्षा के समय उन्होंने भावी दामाद का गुलाब की पंखुड़ियों के रस से तिलक किया। बेटी की तकदीर अपने हाथों से लिखने वाले पिता आज भी अपनी बेटी को अपना वैलेनटाइन गर्व से मानते हैं।
विज्ञापन


वाईपी गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने अपनी बेटी को पहले भारत में शिक्षा दी, उसकी महत्वाकांक्षा देख बैंक से लोन लेकर नीदरलैंड में उसे मैनेजमेंट का कोर्स कराया। यही नहीं नीदरलैंड में ही उसका विवाह भी तय किया, लेकिन इन सबके साथ भारतीय संस्कृति व संस्कार से मोह इतना कि जिले में लाकर बेटी के सात फेरे कराए। उनकी बेटी शालिनी इस समय नीदरलैंड की कंपनी एफडीए में फाइनेंसिएल एनॉलिस्ट के पद पर हैं।

 

बेटी ने भी बुलंदियों पर जाने के सपने देखे

बेटी शालिनी, दामाद साइमन के साथ पिता वाईपी गुप्ता, मां मनोरमा गुप्ता व बेटा शैलेंद्र गुप्ता का परिवार
वाईपी गुप्ता बीएसएनएल एक्सचेंज में आफिस सुप्रीटेंडेंट पद से सेवानिवृत्त हैं। उनकी पत्नी मनोरमा अभी भी इसी पद पर बीएसएनएल में ही कार्यरत हैं। उनका बेटा शैलेंद्र गुप्ता मुंबई में एक निजी कंपनी में डीजीएम हैं। बेटी के जन्म से लेकर उसका विवाह कराने तक  पिता वाईपी गुप्ता ने कई तरह के उतार चढ़ाव देखे।

बचपन से ही मेधावी शालिनी के लिए न सिर्फ पिता के दृष्टिकोण से उन्होंने बल्कि बेटी ने भी बुलंदियों पर जाने के सपने देखे, जिसको पूरा करने के लिए न सिर्फ बेटी बल्कि पिता ने पूरा जोर लगा दिया। लखनऊ आईआईटी से बीटेक कराने के बाद बेटी बंगलौर में विप्रो कपंनी में प्रोजेक्ट लीडर पर तैनात हो गई, लेकिन इसके बाद भी उसने सपने देखना नहीं छोड़ा।

 
विज्ञापन

वर्ष 2008 में शालिनी ने नीदरलैंड में एमबीए करने का मन बनाया। पिता ने नहीं रोका। सिर्फ एक माह की तैयारी के बाद उसने परीक्षा पास कर ली और एक साल के एमबीए के लिए पिता ने 60 लाख की राशि चुकाई। हालांकि इस राशि को चुकाने में पिता माता ने न सिर्फ अपना सब लगाया बल्कि बैंक लोन भी लिया। इसके बाद जैसे ही कोर्स पूरा हुआ और वह कैंपस सेलेक्शन के जरिए एफडीए कंपनी में फाइनेंसिएल ऍनोलिस्ट के पद पर तैनात हो गई।

माता पिता को शादी की चिंता सताई। जॉब छूटने के डर से बेटी से उसी देश में शादी करने की इच्छा जताई। पिता केस के पुत्र साइमन ओनवान से रिश्ता तय किया। 24 फरवरी वर्ष 2018 को उन्होंने भारतीय रीति रिवाज से शादी कराई। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी उनके लिए वैलेनटाइन है, जो आजीवन रहेगी।   उन्होंने बताया कि दूसरे देश में जाने के बाद भी जब उसके आफिस में लंच का समय होता है तो रोजाना पहले वह उन्हें फोन करती है उनसे बात करने के बाद वह लंच लेती है। साथ ही यह भी बताते हैं कि शिक्षा के लिए बैंक लोन भी उनकी बेटी ने ही चुकाया।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें