गंगा में आई बाढ़ का फायदा अब कानपुर जल निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी उठा रहा है। सीवर लाइन की मरम्मत के बहाने इस समय जाजमऊ क्षेत्र से रोजाना करीब 1.5 करोड़ लीटर सीवर का कचरा गंगा में बहाया जा रहा है। इसके लिए बाकायदा जिला प्रशासन से अनुमति भी ली गई है। पिछले चार-पांच दिन से यह क्रम चल रहा है। अभी इस पूरे महीने कचरा गंगा में जाता रहेगा।
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नमामि गंगे योजना के तहत गंगा में गिरने वाले नालों को मोड़ने का काम शुरू किया गया है। इसी प्रोजेक्ट में सीवर लाइनों के टूटे पाइपों की मरम्मत भी की जानी है। इसी के तहत वाजिदपुर से पुरानी चुंगी तक मरम्मत का काम शुरू किया गया है। इसके चलते इस सीवर लाइन से शहर का जो भी प्रदूषित कचरा सीधे ट्रीटमेंट प्लांट में जा रहा था, वह अब गंगा में जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से भी जल निगम को इसकी अनुमति मिल गई है।
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बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी का कहना है कि गंगा के पास नालों और इस तरह के दूसरे निर्माण बाढ़ के दौरान ही कराए जाने की व्यवस्था है। बाढ़ में कचरा बहकर निकल जाता है। इसी वजह से सीवर लाइन की मरम्मत का काम शुरू किया गया है। - कुलदीप मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड