समाजवादी पार्टी के विवाद पर रविवार को कानपुर शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। गली-चौराहे, नुक्कड़ों और चाय के अड्डों पर सपा की ही बातें होती रहीं। मुस्लिम बहुल इलाकों में भी यही हाल रहा। मुस्लिम मतदाता भी मुलायम और अखिलेश पक्ष में बंटा हुआ है। युवा अखिलेश यादव के विकास के कामों की वजह से उनकी तारीफ कर रहे हैं तो बाकी मुसलमानों का कहना है कि उन्होंने पिछले चुनाव में मुलायम सिंह यादव को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर वोट दिया था। अखिलेश के नाम का तो चुनाव के पहले गुमान तक न था।
मुस्लिम बहुल इलाकों के लगभग चाय के हर होटल, चौराहे, नुक्कड़ों से लेकर शिक्षकों, डॉक्टरों और बुद्धिजीवियों के बीच इसी बात की चर्चा रही। मूवमेंट फॉर मुस्लिम इंपॉवरमेंट के महासचिव डॉ. इशरत सिद्दीकी का कहना है कि सपा को वोट तो मुसलमानों का ही चाहिए लेकिन अखिलेश ने मुस्लिमों के लिए जो काम किया, उससे पढ़ा लिखा वर्ग संतुष्ट नहीं है। इसके अलावा प्रतापगढ़ में सीओ जियाउल हत्याकांड, मुजफ्फरनगर दंगे आदि में सपा सरकार की नाकामी से मुसलमान नाराज हैं। मुसलमान सपा को इसलिए वोट देता है कि वह मुलायम सिंह यादव को जानता है और बाबरी मस्जिद कांड के बाद वे मुसलमानों के हीरो बने थे।
दादामियां खानकाह के नायब सज्जादानशीन सैयद अबुल बरकात नजमी ने कहा कि मुसलमान जज्बातों में बहकर वोट करता है। अगर बात अखिलेश और मुलायम के बीच हुई, मुलायम ने जज्बाती तकरीर कर बाबरी मुद्दा उठाया तो जाहिर है कि मुस्लिम मुलायम को ही चुनेंगे। हालांकि इस बार मुसलमानों के सामने सपा के अलावा बसपा भी विकल्प है और कांग्रेस व ओवैसी भी उनको रिझाने की कोशिश कर रहे हैं।