जिनको अपनों ने ठुकरा दिया जिनकी हाथो का कलाईयां कई वर्षों से सूनी पड़ी थीl इन मुश्लिम बहनों ने इन बुजुर्गो की कलाइयों में राखी बांधी वही भाइयो ने पैर छू कर बहनों से आशीर्वाद भी लिया l लेकिन इन भाइयो के पास बहनों को उपहार देने के लिए कुछ भी नही था...
उन्होंने इश्वर से कामना की हमारी यह बहने हमेशा खुश रहेl जब मुश्लिम बहन ने राखी बांधी तो वह फूट-फूट कर रोने लगी बहन को रोता देख बुजुर्ग भाई "गाना गाने लगे रोना कभी नही रोना बहना चाहे टूटे कोई खिलौना "l
किदवई नगर स्थित वृधाश्रम में मुश्लिम बहनों ने रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया l इन बुजुर्गो से मिलने के लिए इनके अपने कभी नही आते है चाहे वह कितना बड़ा त्यौहार क्यों न हो l इनके साथ समय बिताने के लिय उनके पास टाइम नही है l यहां बुजुर्ग खुद को तन्हा समजते है और अकेला महसूस करते हैl
एरोज स्कूल में पढ़ाने वाली इन शिक्षिकाओ ने सूनी पड़ी बुजुर्ग भाइयों की कलाइयों में राखी बांधने का फैसला किया थाl अफरोज जहां बोली आज मैंने इन बुजुर्ग भाइयो की कलाइयों में राखी बांधी है। मै बहुत ही ख़ुशी और गौरवान्वित महसूस कर रही हूं l इन बुजुर्गों ने अपनी जिन्दगी में दिन रात मेहनत कर बच्चों को पढ़ाया लिखाया उनको इस काबिल बनाया l लेकिन इनको उसके बदले में मिला क्या सिर्फ अकेलापन इन्हें अपनों ने ही ठुकरा दियाl
इनके पास सब कुछ होंने के बाद भी इनके पास कुछ नही है ,जब हमने बुजुर्गो की कलाइयों में राखी बांधी तो उनके आंखों में आसू आ गएl उनको अपने घरो की याद आ गई उन बहनों की याद आ गई जो इन्हें कभी राखिया बांधा करती थीl जब इन बुजुर्गो ने हमारे पैर छुए तो हमने उनकी सलामती के लिए दिल से दुआएं कीl
हमने जब राखी बांधी तो उनके आँखों में ख़ुशी के आसू थे, उनकी आंखे बहुत कुछ कह रही थीl सीमा परवीन ने जैसे ही बुजुर्ग भाइयो की कलाइयों पर राखी बांधी तो वह फूट-फूट कर रोने लगी l उनको अपना बचपन याद आ गया जब वह अपने भाई की कलाई पर राखी बांधा करती थी, इसके साथ ही इन भाइयों की हालत देख कर वह रो पड़ीl बहन को रोते देख एक भाई बोले रोना कभी नही रोना बहना चाहे टूटे कोई खिलौनाl यह सुन कर इस बहन के आसू थम गए, उन्होंने कहा क्या बुढ़ापे में बच्चे हमें भी ऐसे ही छोड़ देगे, लेकिन इन बातों का जवाब वहां पर किसी के पास नही थाl