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जानिए आखिर क्यों फेल हुआ 'मुलायम का सुलह फॉर्मूला', अखिलेश-शिवपाल के बीच दरार की ये हैं बड़ी वजह

Wed, 29 Aug 2018 08:13 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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shivpal and akhilesh
अखिलेश यादव जब सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे तभी उन्होंने अपनी नई टीम की घोषणा कर दी थी। अखिलेश की नई टीम में शिवपाल सिंह यादव को जगह नहीं मिली थी। ऐसे में शिवपाल को लेकर अखिलेश की खटास पहले ही साफ नजर आने लगी थी। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने पारिवारिक और पार्टी की कलह को मिटाने की तमाम कोशिशें कीं, अलग-अलग फार्मूले इस्तेमाल किए लेकिन अखिलेश-शिवपाल की बीच दूरियां खत्म नहीं हो पाईं। इटावा के सैफई में आयोजित होली मिलन समारोह में आखिरी बार पूरा समाजवादी कुनबा एक साथ एक मंच पर दिखा था। तब ये कयास लगाए जा रहे थे कि अब समाजवादी पार्टी में सब कुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन अब की स्थितियां सबके सामने हैं। 
 
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शिवपाल, अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी में लगातार उपेक्षा के बाद पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने अपने अलग समाजवादी सेक्युलर मोर्चा का गठन कर दिया है। उन्होंने कहा है कि समाजवादी सेक्युलर मोर्चा यूपी में नया सियासी विकल्प होगा। इसके जरिए मैं छोटे दलों को जोड़ूंगा। वहीं, इस मुद्दे पर अखिलेश यादव ने कहा है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएगा तमाम चीजें देखने को मिलेंगी, फिर भी सपा की साइकिल बढ़ती ही रहेगी।
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अखिलेश यादव व शिवपाल यादव - फोटो : amar ujala
शिवपाल सिंह ने कहा कि सपा में अपनी इज्जत न होने से मैं आहत हूं। मुझे किसी भी मीटिंग में नहीं बुलाया जाता था। उन्होंने ये भी कहा कि उस पार्टी में अब नेताजी का भी सम्मान नहीं किया जाता है। उनकी उपेक्षा से मैं बहुत दुखी हूं। उन्होंने कहा कि जिसका भी सम्मान सपा में नहीं हो रहा है, वे हमारी पार्टी में आ जाएं। शिवपाल सिंह ने भाजपा में जाने की बात को अफवाह बताया।
 
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अखिलेश और शिवपाल के बीच सुलह के लिए नया सूत्र
गौरतलब है कि मंगलवार को सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव और पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव के बीच काफी देर गुफ्तगू हुई थी। सूत्रों के मुताबिक दोनों के बीच सेक्युलर मोर्चे को लेकर अहम बातचीत हुई थी। इससे पहले लोहिया ट्रस्ट की बैठक में सोमवार को ही मुलायम-शिवपाल ने ट्रस्ट के कार्यों की गहन समीक्षा और आगामी लोकसभा चुनाव पर चर्चा की थी। इसके अगले ही दिन दोनों एक साथ फिर बैठे। इस दौरान एक शिवपाल समर्थक नेता की ओर से गठित सेक्युलर मोर्चे को लेकर रणनीति बनाई गई।
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