पीएसआईटी में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में शामिल प्रोफेसर
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कानपुर। छात्रों को किताबों से बाहर निकालकर व्यावहारिक शिक्षा की ओर जाना चाहिए। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी इंडस्ट्री–कनेक्ट और नवाचार आधारित शिक्षा की ओर ले जाती है। जब विभिन्न देशों के शोधकर्ता और विद्यार्थी एक साथ विचार साझा करते हैं तो नए शोध विचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अवसर उत्पन्न होते हैं। यह बात यूजीसी के संयुक्त सचिव जितेंद्र त्रिपाठी ने कही। वह पीएसआईटी में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित थे।
रविवार को सम्मेलन का समापन हुआ। इसमें देश–विदेश से आए 150 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और 18 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए। इनमें मशीन लर्निंग, एजेंटिक एआई, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स, ऊर्जा दक्षता, स्पेस टेक्नोलॉजी और स्मार्ट सिस्टम जैसे उभरते क्षेत्रों पर किए गए शोध विशेष रूप से चर्चा में रहे। 53 शोधपत्रों का चयन स्प्रिंगर नेचर में प्रकाशन के लिए किया गया। विशिष्ट अतिथि डीआरडीओ मुख्यालय, नई दिल्ली के डीओपी निदेशक डॉ. एसके द्विवेदी ने कहा कि शोध तभी सफल होता है जब उसके पीछे मजबूत टीम, सही दिशा और अनुशासित अनुसंधान हो। विशेष अतिथि डीएसटी नई दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर यादव ने कहा कि आज का दौर सिर्फ विचारों का नहीं, बल्कि उन विचारों को प्रयोगों और प्रोटोटाइप के रूप में बदलने का है।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में आईआईआईटीएम ग्वालियर के डॉ. इरशाद आलम अंसारी ने मशीन लर्निंग आधारित वास्तविक जीवन समाधान समझाए। डीटीयू नई दिल्ली के प्रो. डॉ. दिनेश के. विश्वकर्मा, आईआईआईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. संदीप शुक्ला, एमिटी यूनिवर्सिटी जयपुर के डॉ. कनाड रे ने विचार रखे। पीएसआईटी इंक्यूबेशन सेल के 20 से अधिक स्टार्टअप्स ने अपने नवाचार प्रदर्शित किए। संस्थान के चेयरमैन प्रणवीर सिंह ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन छात्रों को वैश्विक स्तर पर सीखने और शोध-नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने का अनूठा अवसर देते हैं। समूह निदेशक डॉ. मनमोहन शुक्ला ने कहा कि दो दिन तक चली तकनीकी चर्चाएं से छात्रों को उच्च स्तरीय शोध के लिए प्रेरित करेंगी।