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लॉकडाउन में फंसा बेटा, मां बोली कैसे आ सकते हो, जवाब मिला साइकिल से, गाय बेंच खाते में डाले रूपये

Fri, 01 May 2020 11:25 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रूखाबाद
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आपबीती सुनाता युवक - फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश में हरदोई के एक गांव महमूद नगर निवासी दिलीप कुमार तीन माह पहले बुलंदशहर गया था। वहां फर्श पर टाइल्स लगाने का काम करता था। लॉकडाउन में काम न मिलने से उसके रुपये खत्म हो गए। भोजन का संकट आ गया। इसकी जानकारी से दुखी मां राजेश्वरी देवी ने बेटे से पूछा कैसे घर आ सकता है।
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बेटे ने कहा कि साइकिल हो तो आ सकता हूं। साथ ही साइकिल खरीदने के लिए रुपये बैंक खाते में डालने को कहा। मां ने लोगों से रुपये उधार मांगे तो नहीं मिले। इस पर उसने अपनी गाय 4000 रुपये में बेच दी और रुपये पुत्र के खाते में जमा कर दिए। ये रकम निकालकर दिलीप ने 3500 रुपये की साइकिल खरीदी।

26 अप्रैल को साइकिल से घर के लिए बुलंदशहर से निकल पड़ा। 30 अप्रैल की देर शाम नवाबगंज पहुंचा। वहां चौराहे पर कुछ लोगों को अपनी कहानी बताई। कहा कि उसे रास्ते में कई जगह पुलिस ने रोका और डंडों से पीटा। उसने शरीर पर लगी चोटें भी दिखाईं।
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कहा कि कई बैरियरों पर पुलिस ने उसे वापस कर दिया। इस पर उसने सड़क छोड़ दी और खेतों के रास्ते किसी तरह निकला। चोट के निशान देख लोगों ने उसे दवा दिलाई और भोजन कराया। इसके बाद वह साइकिल से अपने घर के लिए रात में ही निकल गया।
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