एक किसान का बेटा मां की चित्रकारी से प्रेरित होकर चित्रकार बन गया, उसकी कला के प्रदर्शन के लिए कई बार विदेश जानें का मौका भी मिला लेकिन धन के अभाव वह न जाया पाया। दिल्ली के एक कारोबारी ने फंडिंग का प्रस्ताव दिया लेकिन स्वाभिमानी लड़के ने ऐसा करने से मना कर दिया।
कानपुर/पुखरायांः कस्बे में एक किसान का बेटा मां की चित्रकारी से प्रेरित होकर चित्रकार बन गया। प्रतियोगिताओं में लगातार प्रोत्साहन मिलने पर उसने अंतरराज्यीय पहचान बना ली। कला का प्रदर्शन करने के लिए विदेश जाने के मौके भी मिले लेकिन धनाभाव के चलते नहीं जा सका।
कस्बे के मालवीयनगर निवासी किसान सत्यदेव मिश्र के 22 वर्षीय पुत्र शशांक बताते हैं कि उनकी मां ऊषा मिश्रा फुरसत के वक्त चित्र बनाती रहती थीं। उनको देख-देखकर चित्रकार बनने की प्रेरणा मिली। उन्होंने कहीं प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया। बड़े भाई अनादि और नगर के समाजसेवी चिकित्सक डॉ. जय गोयल के प्रोत्साहन ने इस क्षेत्र में काम करने के लिए ऊर्जा का संचार किया।
दयानंद एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज कानपुर की तत्कालीन निदेशक नीरू टंडन ने पहली पेंटिंग खरीदकर पहचान दी। 2008-09 में वह उस संस्थान में बीबीए-द्वितीय वर्ष के छात्र थे। इसके बाद 25 व 26 नवंबर 2011 में डॉ. वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशनल फाउंडेशन की ओर से आयोजित फेश-पेंटिंग में तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक राजेश रॉय के हाथों अवॉर्ड मिला।