पंजाब के कपूरथला निवासी गत्ता फैक्ट्री मजदूर अंबरीक सिंह (42) को जिंदगी ने वो मंजर दिखाया कि कुछ कहते नहीं बना। चार साल से लापता उनके पिता उनको कानपुर में मिले तो वे खुशी से रो पड़े लेकिन जब वे पिता को कानपुर से कपूरथला ले जाने लगे तो रविवार को उनकी मां की मौत हो गई। इसके बाद वे मां का शव लेकर कपूरथला के लिए चले तो रास्ते में एक्सीडेंट में पिता की भी मौत हो गई। वे खुद भी घायल हो गए।
कपूरथला निवासी जगमल सिंह (70) की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। वे चार साल से लापता थे। कुछ दिन पहले भटकते हुए न जाने कैसे कानपुर आ गए तो किसी ने उन्हें उर्सला अस्पताल में भर्ती करा दिया। उर्सला के एक अफसर ने कुछ दिन पहले अंबरीक को फोन करके बताया था कि उसके पिता यहां भर्ती हैं। इसके बाद अंबरीक शहर आए और बेहतर इलाज के लिए पिता को बिरहाना रोड स्थित केपीएम हास्पिटल में भर्ती कराया। परिवार का एक शख्स अस्पताल में जगमल की तीमारदारी में लगा था।
शुक्रवार को अंबरीक मां अजीत कौर के साथ यहां आए। रविवार को वह पिता को अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर घर ले जाने के लिए सेंट्रल स्टेशन पहुंचे। प्लेटफार्म नंबर-एक पर मुरी एक्सप्रेस का इंतजार कर रहे थे कि तभी अजीत कौर की हार्ट अटैक से मौत हो गई। जीआरपी इंस्पेक्टर सतीश गौतम ने जांच के बाद अजीत कौर का शव परिजनों को सौंप दिया। रविवार रात रावतपुर स्थित कटियार एम्बुलेंस वाले की एम्बुलेंस से अंबरीक मां का शव और पिता को लेकर कपूरथला जा रहे थे।
मथुरा में एक्सप्रेस-वे पर सुरीर क्षेत्र में एम्बुलेंस आगे चल रहे वाहन से टकरा गई। हादसे में जगमल सिंह (70) की भी मौत हो गई। अंबरीक सिंह, एंबुलेंस चालक राजकुमार, हेल्पर सीताराम घायल हो गए। अंबरीक माता-पिता का शव लिए घंटों बैठे रोते रहे लेकिन पुलिस और एक्सप्रेस-वे कर्मियों ने उनकी मदद नहीं की। बाद में एसडीएम मांट मौके पर पहुंचे, तब करीब चार घंटे बाद अंबरीक व अन्य घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। बाद में दूसरी एम्बुलेंस मुहैया कराई गई जिसमें वे माता-पिता का शव लेकर कपूरथला गए।