मुंबई सहित देश के कई शहरों में 90 के दशक में हुए सीरियल बम ब्लास्ट का मास्टर माइंड आतंकी एमबीबीएस डॉक्टर जलीस अंसारी को शुक्रवार को एसटीएफ ने कानपुर से गिरफ्तार किया। आजीवन कारावास की सजा काट रहा इंडियन मुजाहिद्दीन का आतंकी जलीश 21 दिन की पेरोल पर अजमेर जेल से बाहर आया था।
पेरोल पूरा होने से पहले विदेश भागने की फिराक में मुंबई स्थित घर से फरार हो गया था। वह पुष्पक एक्सप्रेस से कानपुर आया था और फेथफुलगंज स्थित मस्जिद में नमाज पढ़कर वापस ट्रेन पकड़ने जा रहा था। इसी दौरान एसटीएफ की कानपुर यूनिट ने उसे दबोच लिया।
जलीस को गिरफ्तार कर लखनऊ ले जाया गया है, जहां एटीएस, एनआईए सहित कई जांच एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं। आईजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया कि मूल रूप से संतकबीर नगर जिले के बखिरा थाना क्षेत्र के अमरडोभा गांव निवासी जलीस अंसारी को 1993 में मुंबई, दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में बम ब्लास्ट के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
कई साल से वह अजमेर जेल में सजा काट रहा था। 26 दिसंबर को उसे 21 दिन की पेरोल मिली थी। शुक्रवार को पेरोल का समय पूरा होना था, लेकिन गुरुवार को ही वह अपने मुंबई के अगटीपाड़ा स्थित घर से फरार हो गया। उसी रात घरवालों ने उसकी गुमशुदगी दर्ज करवाई तो मुंबई एसटीएफ ने तलाश शुरू की।
जलीस को पकड़ने के लिए देश भर में अलर्ट जारी किया गया। उसके संतकबीरनगर जाने की आशंका में मुंबई से गोरखपुर की ओर जाने वाली सभी ट्रेनों में छानबीन और सड़क मार्ग पर नाकाबंदी करवाई गई। शुक्रवार को उसकी लोकेशन कानपुर में मिलते ही टीम ने घेराबंदी करके फेथफुलगंज से दबोच लिया।
पुराने दोस्तों से मिलने आया था कानपुर
एसटीएफ की पूछताछ में जलीस ने बताया कि वह शुक्रवार सुबह पुष्पक एक्सप्रेस से कानपुर पहुंचा था। 30 साल पुराने दोस्त अब्दुल रहमान और अब्दुल कयूब से मिलने फेथफुलगंज गया था। यहां पहुंचने पर पता चला कि रहमान की हादसे में मौत हो चुकी है और कयूब शहर छोड़कर जा चुका है।
इसके बाद वह फेथफुलगंज की ऊंची मस्जिद गया। मुतवल्ली से मिलकर मस्जिद में सामान रखा और नमाज पढ़ने के बाद टहलने लगा। लोगों का शक न हो इसलिए पांच साल की बेटी के साथ पैदल जा रहे एक व्यक्ति से बातचीत करके हुए ट्रेन की जानकारी करने के लिए रेलवे स्टेशन जा रहा था। इसी दौरान एसटीएफ ने उसे दबोच लिया।