चिड़ियाघर में गुरुवार को रेसस मकॉक प्रजाति (लाल मुंह वाला बंदर) के मुंह का आपरेशन करके 165 ग्राम का ट्यूमर निकाला गया। उल्लेखनीय बात यह रही कि डॉक्टरों ने बंदर के मुख की कृत्रिम थैली भी बना दी जो ट्यूमर के कारण नष्ट हो गई थी। करीब डेढ़ घंटे तक ऑपरेशन चला।
ऑपरेशन के कुछ घंटे बाद होश आने पर बंदर सामान्य दिखाई दिया। उसे हॉस्पिटल में रखा गया है। निदेशक दीपक कुमार का दावा है कि देश में पहली बार बंदर के ट्यूमर का ऑपरेशन हुआ है। सेंट्रल जू अथॉरिटी के रिकॉर्ड में भी ऐसा कोई ऑपरेशन नहीं दर्ज है। ट्यूमर की वजह से बंदर एक माह से कटखना हो गया था।
गुरुवार को चिड़ियाघर के मुख्य चिकित्सक डॉ. आरके सिंह की देखरेख में सर्जन मोहम्मद नासिर, यूसी श्रीवास्तव की टीम ने ऑपरेशन किया। ऑपरेशन नहीं होता तो मर जाता बंदर डॉ. आरके सिंह ने बताया कि ट्यूमर का वजन तो कम था लेकिन वह आकार में बहुत बड़ा था। ट्यूमर को जांच के लिए दिल्ली की एक लैब में भेजा जाएगा।
कुछ दिनों तक ट्यूमर का ऑपरेशन नहीं होता तो इन्फेक्शन से बंदर की मौत हो जाती। ब्लड और लार का सैंपल भी जांच के लिए लैब भेजा ंहै ताकि पता चल सके कि कहीं इन्फेक्शन बंदर के खून, लार में तो नहीं फैल गया है। उन्होंने बताया कि आपरेशन थियेटर में फिशिंग कैट के बच्च रखे थे, उनको इन्फेक्शन न हो इसलिए आपरेशन शेड में किया।