गुरुवार को मोहर्रम के चांद की तस्दीक होते ही शोक की लहर दौड़ गई। शिया महिलाओं ने कर्बला के शहीदों की याद में चूड़ियां तोड़ दीं और काला मातमी लिबास पहन लिया। कोरोना के कारण सामूहिक मजलिसें न होने के कारण लोगों ने अपने घरों में परिवार के सदस्यों के साथ मजलिस की और कर्बला के शहीदों का गम मनाया।
हुसैनी फेडरेशन के प्रवक्ता हाजी मुंसिफ अली रिजवी और मीडिया प्रभारी डॉ. जुल्फिकार अली रिजवी ने बताया कि शहर के पांच हजार इमाम बाड़ों में अलम और ताजिया सजा दिए गए हैं। कुली बाजार, बेगम पुरवा, मछरिया, आवास विकास कालोनी, रोशन नगर मकबरा ग्वालटोली, पटकापुर, सकेरा इस्टेट आदि स्थानों पर लोगों ने अपने घर में ही मजलिस कर ली।
उन्होंने बताया कि मोहर्रम की पहली तारीख से नौ मोहर्रम तक नौ बड़े जुलूस निकाले जाते हैं। इसके साथ ही जलसे होते हैं लेकिन कोरोना की वजह से इस बार प्रशासन ने इजाजत नहीं दी है। मोहर्रम की 10 वीं तारीख 30 अगस्त को होगी। इस दिन यौम-ए-आशूरा मनाया जाता है।