जिला अस्पताल के वेंटिलेटर कक्ष में निरीक्षण करते सीएमओ बृजेंद्र कुमार सिंह।
- फोटो : जिला अस्पताल के वेंटिलेटर कक्ष में निरीक्षण करते सीएमओ बृजेंद्र कुमार सिंह।
इटावा/सैफई। देश और प्रदेश में कोरोना के लगातार बढ़ रहे मामलों को लेकर उप्र आयुर्विज्ञान विवि व जिला अस्पताल में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मॉक ड्रिल की। यहां लगे ऑक्सीजन प्लांटों की स्थिति को जांचा। मॉक ड्रिल में जिला संयुक्त चिकित्सालय के सभी तीन ऑक्सीजन प्लांट चालू मिले, जबकि आयुर्विज्ञान विवि में लगे पांच में से तीन प्लांट पिछले दो साल से बंद पाए गए।
शनिवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एचओ) की टीम ने ऑक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था को परखने के लिए मॉक ड्रिल की। मॉक ड्रिल में आपातकालीन स्थिति में ऑक्सीजन की उपलब्धता,आपूर्ति और तकनीकी तैयारियों का परीक्षण किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर में लगे तीन ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट बंद पाए गए। हालांकि, दो लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट चालू पाए गए। अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति में किसी प्रकार की कोई बाधा नहीं पाई गई।
टीम में शामिल डॉ. कुणाल ने विश्वविद्यालय के ऑक्सीजन प्लांट के नोडल अधिकारी डॉ. मनोज यादव के साथ निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि कोरोना महामारी के दौरान लगाए गए तीनों पीएसए ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट वर्तमान में खराब हालत में हैं। इनमें से एक प्रधानमंत्री केयर फंड से व दो मुख्यमंत्री केयर फंड से स्थापित किए गए थे। वर्तमान में यह प्लांट संचालन से बाहर हैं, लेकिन इनकी मरम्मत की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जा रही है।
नोडल अधिकारी डॉ. मनोज यादव ने बताया कि इन तीनों प्लांटों की मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया एक-दो दिन में शुरू कर दी जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परिसर में संचालित दो लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रहे हैं। किसी भी स्तर पर संकट की स्थिति नहीं है।