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CBI जांच के घेरे में MLC, मौरंग कारोबारी और ट्रांसपोर्टर

Sun, 20 Aug 2017 12:11 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
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हमीरपुर में अवैध खनन की जांच कर रही सीबीआई की जांच के घेरे में कानपुर से जुड़े एमएलसी, मौरंग कारोबारी और ट्रांसपोर्टर आ गए हैं। इन लोगों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए सीबीआई की एक टीम देर शाम शहर आ गई। रात होने की वजह से सीबीआई कुछ खास जानकारी नहीं जुटा पाई, लेकिन इससे यह जरूर साफ हो गया कि अब सीबीआई शहर में छापेमारी करेगी। माना जा रहा है कि सीबीआई अगले एक दो दिन में दोबारा शहर आ सकती है। इधर, सीबीआई की शहर आने से अवैध खनन से जुड़े एमएलसी, उनके रिश्तेदार, दोस्त और मौरंग कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। इसमें से कुछ कारोबारी सीबीआई के आने का पता चलते ही शहर से हट गए। वे सीबीआई के जाने के बाद ही वापस आए। 
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23 खंडों में हो रहे अवैध खनन से जुड़े हैं तार 

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सीबीआई के निशाने में शहर के जो लोग हैं उनके तार हमीरपुर और कबरई के 23 खंड (खदान) में हुए अवैध खनन से जुड़े हैं। इसमें पतारा समेत तीन खंड में एमएलसी अवैध खनन करवा रहे थे। एक खंड का पट्टा एमएलसी के भाई के नाम पर है, जबकि अन्य दोनों खंड में वह दबंगई से अवैध खनन करवा रहे थे। इसके अलावा बसपा से विधायक का चुनाव लड़ चुके एक नेता और एक दबंग मुस्लिम के भी अवैध खनन से जुड़े होने का पता चला है। इन लोगों के साथी शहर में रह रहे हैं। 
 

एक ट्रक से लेते थे 5500 रुपये जीटी

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सीबीआई खनन माफियाओं की काली कमाई के सबूत जुटा रही है। इसके लिए सीबीआई ने ट्रांसपोर्टरों से पूछताछ की है। पता चला है कि खनन माफिया रॉयल्टी के नाम पर एक ट्रक से 5500 रुपये जीटी वसूल कर एमएलसी के पास पहुंचाते थे। जीटी (गुंडा टैक्स) वसूली में कोई बेईमानी न हो, इसके लिए हर खंड में सिंडिकेट का एक गुर्गा बैठता था, जो हर दिन का हिसाब एमएलसी के पास पहुंचाता था। विधानसभा चुनाव होने से करीब छह महीने पहले सिंडिकेट ने इस जीटी को बढ़ाकर 7500 रुपये कर दिया था। एक ट्रांसपोर्टर के मुताबिक हमीरपुर से एक दिन में औसतन तीन हजार ट्रक मौरंग निकलती थी। इस हिसाब ने सिंडिकेट को एक दिन में डेढ़ करोड़ से ज्यादा की कमाई होती थी। जिसे कारों से एमएलसी के कानपुर स्थित घर में पहुंचाया जाता था। 
 

बेनामी संपत्ति का पता चला

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अवैध खनन से जुड़े एमएलसी ने अवैध खनन की काली कमाई को प्रापर्टी में खपाया है। साथ ही उसने दो से तीन फिल्म में भी पैसा लगाया है। जांच में पता चला है कि एमएलसी ने बिल्डर साथी के जरिए पराग दूध डेरी के पास करोड़ों रुपए की जमीन खरीदी है। एमएलसी के साथी बिल्डर का ऑफिस काकादेव में देवकी टाकिज के पास है। एमएलसी का बंगला नौबस्ता थानाक्षेत्र में बसंत विहार में है, जबकि उनके भाई गीता पार्क के पास अपार्टमेंट में रहते हैं। इसके अलावा उनकी लखनऊ, नोएडा और दिल्ली में भी संपत्ति और फ्लैट हैं। सीबीआई को कुछ प्रॉपर्टी के दस्तावेज भी मिल गए हैं। अवैध खनन से जुड़े बसपा नेता ने भी कानपुर, लखनऊ, दिल्ली में बेनामी प्रापर्टी बनाई है।
 
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इन लोगों पर कसेगा शिकंजा 

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हमीरपुर और कबरई में जो लोग अवैध खनन करते थे। उसमें से ज्यादातर लोग कानपुर में शिफ्ट हो गए है। उन्होंने यहां पर प्रापर्टी बना ली है। अवैध खनन से कानपुर के ज्यादातर मौरंग कारोबारी और ट्रांसपोर्टर जुड़े है। यादव ट्रांसपोर्टर के तो दो सौ से ज्यादा ट्रक अवैध खनन से जुड़े थे। वह भी सीबीआई की जांच के घेरे में आ गया है। इसके अलावा सीबीआई अवैध खनन के समय नौबस्ता, घाटमपुर और सजेती थानों का चार्ज संभालने वाले कुछ थानेदार और आरटीओ के एक अफसर व कुछ कर्मियों के बारे में जानकारी कर उनसे पूछताछ कर सकती है। 
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