विकास कार्य कराने के लिए विधायकों को हर वर्ष मिलने वाली करोड़ाें की राशि खर्च नहीं हो पा रही है। प्रदेश सरकार हर विधायक को अभी प्रति वर्ष ढाई करोड़ रुपये देती है। पिछले दो वित्तीय वर्ष के दौरान ज्यादातर विधायक निधि की राशि खर्च करने में पीछे रहे हैं।
कहा जा रहा है कि सभी विधायक ज्यादा से ज्यादा राशि चुनावी वर्ष में खर्च करने के लिए बचा रहे हैं। फिलहाल अब यह निधि ढाई से बढ़कर तीन करोड़ होने जा रही है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि जब ढाई करोड़ खर्च करने में यह हालत है तो तीन करोड़ कैसे खर्च होंगे।
वर्ष 2017 में जब विधायक चुनकर आए थे तब विधायक निधि देर से आवंटित होने से विकास कार्यों के प्रस्ताव देने और पूरी राशि खर्च करने में दिक्कत आई थी। इसके बाद लोगों को लगा था कि विधायक 2018-19 में अपनी पूरी निधि समय से विकास कार्यों पर खर्च कर देंगे।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वर्ष 2019-20 का हाल भी पिछले वर्ष जैसा ही सामने आया। अभी पूरी राशि खर्च नहीं हो पाई है। दरअसल विधायकों को प्रत्येक वर्ष मिलने वाली निधि पांच वर्ष के बाद ही लैप्स होती है। इसीलिए ये जनप्रतिनिधि चुनावी वर्ष में निधि खर्च कर अपना वोट बैंक मजबूत करने की जुगत लगाते हैं।
इस तरह निधि खर्च कर रहे विधायक
भगवती सागर (बिल्हौर)
2018-20 में 1.36 करोड़ 20 हजार के 35 प्रस्ताव
2019-20 में, 1.72 करोड 88 हजार के 32 प्रस्ताव
नीलिमा कटियार (कल्याणपुर)
2018-20 में 1.85 करोड़ 65 हजार के 49 प्रस्ताव
2019-20 में 1.62 करोड के 43 प्रस्ताव
सतीश महाना (महाराजपुर)
2018-20 में 2.79 करोड़ 68 हजार के 55 प्रस्ताव
2019-20 में 1.66 करोड 67 हजार के 53 प्रस्ताव
कमलरानी वरुण (घाटमपुर)
2018-20 में 2.23 करोड़ के 22 प्रस्ताव
2019-20 में 2.24 करोड 88 हजार के 20 प्रस्ताव
सोहेल अंसारी (छावनी)
2018-20 में 1.10 करोड़ 6 हजार के 27 प्रस्ताव
2019-20 में 1.38 करोड 55 हजार के 35 प्रस्ताव
महेश त्रिवेदी (किदवई नगर)
2018-20 में 1.22 करोड़ के 49 प्रस्ताव
2019-20 में 2.89 करोड 39 हजार के 48 प्रस्ताव
सुरेंद्र मैथानी (गोविंद नगर)- दो महीने पहले विधायक बने
2019-20 में 95.87 लाख के 32 प्रस्ताव
अमिताभ बाजपेई (आर्यनगर)
2018-20 में 1.84 करोड़ के 45 प्रस्ताव
2019-20 में 1.18 करोड़ के 42 प्रस्ताव
इरफान सोलंकी (सीसामऊ)
2018-20 में 2.14 करोड़ 63 हजार के 37 प्रस्ताव
2019-20 में 2.56 करोड़ के 66 प्रस्ताव