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विधायक-डॉक्टर में हुआ समझौता

Fri, 12 Aug 2016 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो /कानपुर
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एडीएम सिटी आवास के बाहर डाॅ. एसके मिश्रा को मिठाई खिलाते विधायक इरफान सोलंकी। - फोटो : amarujala
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अमर उजाला ब्यूरो 
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कानपुर। उर्सला के पैथोलॉजिस्ट व कार्यवाहक प्रभारी डॉ. एसके मिश्रा और सपा विधायक इरफान सोलंकी के बीच गुरुवार शाम एडीएम सिटी के आवास पर समझौता हो गया। विधायक पर माफी मांगने का दबाव बनाने वाला प्रांतीय चिकित्सा संवर्ग (पीएमएस) समझौता होने की बात बोलने लगा। वहीं  विधायक ने कहा कि उन्होंने डॉक्टर को सॉरी नहीं बोला है, गिले-शिकवे दूर  किए हैं। हालांकि डॉक्टर को डर है कि जल्द ही उनका गैरजनपद तबादला कर दिया जाएगा। यह दर्द उन्होंने पीएमएस की जनरल बॉडी की मीटिंग में भी         रखा। वहीं डीएम के निर्देश पर शाम को डॉ. एसके मिश्रा ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि शुक्रवार से वह ब्लड बैंक में काम करेंगे। मां की तबियत खराब है। इस घटना से बहुत दुख हुआ है। सपा नगर अध्यक्ष के जन्मदिन पर बुधवार दोपहर को उर्सला के ब्लड बैंक में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर लगाया गया था। कैंप में पहुंचे सपा विधायक इरफान सोलंकी और डॉ. एसके मिश्रा के बीच खून की जांच को लेकर बहस हो गई। इससे विधायक नाराज हो गए और डॉ. एसके मिश्रा की डॉक्टर की डिग्री फर्जी होने, इसकी जांच कराने और उन्हें एक हफ्ते में हटवाने की बात कहने लगे। आरोप है कि विधायक और उनके समर्थकों ने डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ से अभद्रता, धक्कामुक्की की। इससे डॉ. मिश्रा गिर गए। इसके बाद डॉ. मिश्रा ने इस्तीफा देने का एलान कर दिया।


पीएमएस की मीटिंग में डिग्री लेकर पहुंचे डॉ. मिश्रा
गुरुवार दोपहर पीएमएस ने उर्सला सभागार में बैठक की। डॉ. एसके मिश्रा अपनी डिग्रियां लेकर पहुंचे थे। अध्यक्ष डॉ. के स्वरूप ने कहा कि विधायक माफी मांगना चाहते हैं। डॉ. मिश्रा विधायक के माफी मांगने से संतुष्ट नहीं हैं तो संघ उनके साथ है। सभी डॉक्टर इस्तीफा देंगे। विधायक ने सर्किट हाउस में माफी मांगने की बात कही है। इस पर डॉक्टरों ने कहा कि विधायक भीड़ में गाली दें और अकेले में माफी मांग लें यह नहीं चलेगा। उन्हें उर्सला में मीडिया की मौजूदगी में माफी मांगनी होगी। मीटिंग में पूर्व सीएमओ डॉ. वीसी रस्तोगी, सचिव डॉ. केएस मिश्रा, डॉ. एके सिंह, डॉ. अरविंद यादव समेत 3७ डॉक्टर मौजूद रहे।
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बैकफुट पर दिखा पीएमएस
मामला सत्ता पक्ष से जुड़ा होने के कारण पीएमएस शुरू से ही बैकफुट पर दिखा। यही वजह रही कि पीएमएस के पदाधिकारियों ने ही फोन पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को उनकी लड़ाई में न शामिल होने को कहा। इसके बाद आईएमए ने अपनी बैठक स्थगित कर दी। इधर, उर्सला के डायरेक्टर ने भी डॉक्टरों को चेतावनी दी थी कि मिल-बैठकर समझौता करें, कोई बाहरी न आए। सूत्रों का कहना है कि डायरेक्टर ने यहां तक कह दिया था कि यदि डॉक्टरों के आंदोलन से किसी मरीज को दिक्कत हुई तो मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा। 
 
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