केस एक : हरदोई के छात्र ने बीटेक में प्रवेश लिया है। उसको भोजन अच्छा नहीं लगने और संस्थान में अकेलापन महसूस होने जैसी दिक्कत है।
केस दो : बीटेक में दाखिला लेने वाले फर्रुखाबाद के छात्र को घबराहट हो रही है। उसे शाम को अजीब लगता है। पढ़ाई समझ नहीं आ रही है।
माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर। बेहतर भविष्य के लिए घर, परिवार, दोस्तों और शहर को छोड़कर आए छात्र-छात्राओं को अकेलापन, अजीब सा डर सता रहा है। उनका मन किसी काम में नहीं लग रहा है। पढ़ाई और कोर्स समझ से परे हैं। यह दिक्कतें छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले नव प्रवेशित छात्रों को आ रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय के विकसित किए गए नेवर अलोन एप में अपनी बात कहनी शुरू कर दी है। हरदोई और फर्रुखाबाद के छात्रों के केस उदाहरण हैं। अब तक 48 छात्र एप का इस्तेमाल कर चुके हैं। उनके मैसेज पर विश्वविद्यालय की काउंसलिंग सेल सक्रिय हो गई है। छात्र-छात्राओं से बातचीत करने के साथ उनका संपर्क उनके माता पिता और दोस्तों से कराया जा रहा है। कुछ छात्र मम्मी पापा की याद आने की बात कर रहे हैं। कुछ को संस्थान का खाना पसंद नहीं आ रहा है।
नए सत्र की शुरुआत के साथ ही क्लीनिकल साइकोलॉजी विभाग ने नेवर अलोन एप का क्यूआर कोड विभाग में लगा दिया है। नव प्रवेशित छात्र इसे स्कैन करके मदद ले रहे हैं। स्कैन करते ही यह व्हॉट्स से जुड़ जाता है। यह छात्र से सवाल पूछना शुरू कर देता है। सीएसजेएमयू वेल बीइंग सेल के प्रभारी असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सृजन श्रीवास्तव का कहना है कि एप का शुभारंभ दीक्षांत समारोह से हो गया था। अब तक 48 बच्चों ने एप का इस्तेमाल किया है। नई जगह आकर उन्हें अकेलापन महसूस हो रहा है। अभी सामंजस्य नहीं बिठा पा रहे हैं। पढ़ाई को लेकर भी घबराहट है।
-
एप बेहतर से कार्य कर रहा है। छात्राें की काउसलिंग कराई जा रही है। जिन छात्रों को ज्यादा दिक्कत है, उन्हें कुछ समय के लिए परिवार के साथ रहने के लिए कहा जा रहा है।
- प्रो. विनय कुमार पाठक, कुलपति, सीएसजेएमयू