दिल्ली में उन्नाव की दुष्कर्म पीड़िता की मौत के कुछ घंटे पहले शुक्रवार की रात कानपुर देहात की एक सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता ने मौत को गले लगा लिया। रूरा क्षेत्र की आठवीं कक्षा की यह छात्रा 22 दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से सदमे में और गांव वालों के तानों से तंग थी। उसने कानपुर नगर के चौबेपुर क्षेत्र में चचेरी बहन के घर में फांसी लगाई। शनिवार सुबह परिजनों ने पुलिस पर आरोपियों से साठगांठ का आरोप लगाया तो अफसर हरकत में आए। पुलिस ने तीन में से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
रूरा थाना क्षेत्र में ग्राम पंचायत के संविदा सफाई कर्मी की 15 वर्षीय बेटी गांव के ही स्कूल में पढ़ती थी। सफाई कर्मी के मुताबिक 13 नवंबर को बेटी शौच के लिए गई थी। वहां से लापता हो गई थी। 16 नवंबर को उन्होंने गांव के सन्नी, उसके चाचा लाला और रिंकू के खिलाफ बेटी के अपहरण की तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने दोपहर में बहला-फुसलाकर ले जाने की धारा में रिपोर्ट दर्ज की।
16 नवंबर की शाम को छात्रा घर लौटी और परिजनों को आपबीती सुनाई। उसी दिन रात में परिजन छात्रा को थाने ले गए। छात्रा ने पूछताछ में सन्नी लाला और रिंकू पर सामूहिक दुष्कर्म करने की बात कही। पुलिस ने छात्रा का मेडिकल कराया। 22 नवंबर को मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान भी हुआ। इसमें भी उसने अपनी आपबीती सुनाई। छात्रा के बयान के आधार पर पुलिस ने 2 दिसंबर को दर्ज एफआईआर में सामूहिक दुष्कर्म और अपहरण की धारा बढ़ा दी, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की।
इधर, गांव वालों के तानों से परेशान छात्रा को परिजनों ने 29 नवंबर को कानपुर नगर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली चचेरी बहन के घर भेज दिया। तब से वह यहीं रह रही थी, लेकिन खुद के साथ हुई दरिंदगी को भूल नहीं पा रही थी। 6 दिसंबर की रात करीब आठ बजे उसने रिश्तेदार के घर में ही फांसी लगा ली। शनिवार की सुबह आक्रोशित परिजनों ने पुलिस पर आरोपियों से साठगांठ का आरोप लगाकर हो-हल्ला किया।