फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाएगी सुनवाई
थाना प्रभारी अशोक कुमार के अनुसार वैन की फॉरेंसिक टीम ने जांच की, जहां सीट पर खून मिला। वहीं, आरोपी की अंगुलियों पर बेंजीडीन टेस्ट किया गया, जिनमें खून मिला है। आरोपी ने वारदात को अंजाम देने के बाद पानी से अपने हाथ धोए थे। इन सभी साक्ष्यों को कोर्ट में पेश करके कल्लू को सख्त सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा। रावतपुर थाना प्रभारी अशोक कुमार सरोज ने बताया कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाएगी।
तीन बेटियों का पिता कल्लू बन गया वहशी
कल्लू की तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी 10 साल की, दूसरी सात साल और तीसरी चार साल की है। तीन बेटियों के पिता कल्लू की इस हरकत से पूरा परिवार शर्मसार है। वहीं, लोगों में अपनी बेटी की उम्र की छात्र से वहशीपन की हरकत को लेकर चालक के खिलाफ रोष है। पुलिस के अनुसार कल्लू की नशेबाजी और विवाद करने से परेशान होकर उसकी पत्नी चार साल पहले कहीं चली गई थी। तबसे कल्लू अपनी तीनों बेटियों के साथ अपने भाई के परिवार साथ रह रहा था। 2015 के बाद से कल्लू के खिलाफ किसी भी थाने में कोई केस दर्ज नहीं हुआ। वहीं, पूर्व में छेड़छाड़ या दुष्कर्म जैसी कोई शिकायत पुलिस तक नहीं पहुंची।।
डीफ एंड डंब स्कूल में मिले थे छात्रा के माता-पिता
पीड़ित छात्रा की नानी ने दिल्ली से पीड़िता मां को उसके बचपन में लाने के बाद एक डीफ एंड डंब स्कूल में भर्ती करा दिया था। यहीं पर छात्रा की मां की मुलाकात साथ शिक्षा ले रहे छात्रा के पिता से हुई थी। दोनों में दोस्ती की बात पता चलने पर छात्रा की नानी ने दोनों की शादी करवा दी और बेटी-दामाद को साथ में रख लिया। छात्रा की नानी की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने छात्रा की मां के अलावा एक बेटे को भी गोद लिया था, जो उनके साथ में ही रहते हैं।
अपराधी को संरक्षण देना गंभीर अपराध
वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश पांडे के अनुसार घटना की जानकारी के बाद भी वैन के चालक को भगा देना और छुट्टी के बाद दूसरे ड्राइवर से बच्ची को घर भिजवाना इस बात को साबित करने के लिए पर्याप्त है कि स्कूल की शिक्षिकाओं ने जानकारी के बावजूद अपराधी को संरक्षण दिया।
पांच साल तक की हो सकती सजा
स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी थी कि वह तत्काल घटना की सूचना पुलिस को देता और ड्राइवर कल्लू को पुलिस को सौंपा जाता। इसलिए प्रधानाचार्या व तीनों शिक्षिकाओं को आईपीसी की धारा 212 के तहत अपराधी को संरक्षण देने का भी दोषी माना जाना चाहिए। इसके लिए दोषियों को तीन से पांच साल तक की सजा और जुर्माने से दंडित करने का प्रावधान है।
दोषी को छह माह तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान
अधिवक्ता शशांक वर्मा ने बताया कि आईपीसी की धारा 202 के तहत जानबूझकर अपराध की सूचना न देना है। इसमें दोषी को छह माह तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। जमानती अपराध होने के कारण आसानी से जमानत मिल जाएगी, लेकिन धारा 212 अपराधी को संरक्षण देना है। यह अजमानती है। इसमें जमानत मिलना आसान नहीं होगा। साथ ही तीन से पांच साल तक की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है