संयुक्त जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री
शंखलाल मांझी ने मंगलवार को जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। जांच के
दौरान दवाओं का रिकार्ड गड़बड़ मिला, जिस पर उन्होंने सीएमओ आर ए सिंह को
व्यवस्था दुरुस्त कराने को कहा।
मंत्री ने दवा के स्टॉक और वितरण के
रजिस्टर को चेक किया, दोनों में अंतर मिलने पर तैनात स्टाफ को ठीक ढंग से
दवा वितरण कराने को कहा। साथ ही गड़बड़ी पर चीफ फार्मासिस्ट आईपी भाटिया को
नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया। मंत्री केे कड़े तेवर देखकर पूरे
स्वास्थ्य महकमे मेें पूरे दिन हड़कंप मचा रहा।
सूबे के चिकित्सा शिक्षा
एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री शंखलाल मांझी मंगल सुबह 10.50 बजे जिला
अस्पताल पहुंचे। वे सीधे बायोमैट्रिक हाजिरी कक्ष में पहुंचे और अस्पताल आए
स्टाफ को चेक किया। इस दौरान सीएमएस ने उन्हें साफ्टवेयर न अपडेट न होने
की जानकारी दी। इसके बाद मंत्री ने इमरजेंसी चिकित्सा कक्ष में मरीजों से
इलाज की जानकारी ली।
इसके बाद सीधे मंत्री दवा वितरण काउंटर पहुंचे।
उन्होंने दवा स्टॉक रजिस्टर मंगाया और ओपीडी, इमरजेंसी को आवंटित की गई दवा
को चेक किया।
काउंटर में तैनात चीफ फार्मासिस्ट कुसुम सचान ने उन्हें दवा
का स्टाक रजिस्टर चेक कराया। दवा स्टाक रजिस्टर में 22 अप्रैल को
सिप्रोफ्लाक्सासिन छह हजार टैबलेट आवंटित की गई थी, इस पर मंत्री ने चीफ
फार्मासिस्ट कुसुम सचान से अप्रैल का दवा वितरण रजिस्टर मांगा। लेकिन, चीफ
फार्मासिस्ट आईपी भाटिया के छुट्टी होने पर रजिस्टर नहीं मिला। लेकिन,
मंत्री के सख्त तेवर देख सीएमएस ने आनन-फानन आईपी भाटिया को फोन कर रजिस्टर
की जानकारी ली। मंत्री ने मरीजों को रोजाना दी गई दवाओं का वितरण चेक
किया।
उन्हें 27 अप्रैल को दवा वितरण रजिस्टर में कुल 542
सिप्रोफ्लाक्सासिन टैबलेट मरीजों को दी गई जबकि रजिस्टर में उनका कुल योग
1306 दिखाया गया है। मंत्री ने जब इसके बारे में चीफ फार्मासिस्ट कुसुम
सचान इस लापरवाही की जानकारी ली तो पता चला आईपी भाटिया ड्यूटी पर थे।
इस
पर उन्होंने मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. अशोक जटारिया को निर्देश दिए कि
डॉक्टर पर्चे के साथ स्लिप बनाकर दें और उन सारी पर्चियों को वितरण काउंटर
पर जमा करने के बाद दवा दी जाए। इसके बाद उन्होंने सीएमएस रजिस्टर में दर्ज
करते हुए स्पष्टीकरण तलब करने का आदेश दिया।