शिवलिंग पर अापने अक्सर भक्ताें काे दूध चढ़ाते हुए देखा हाेगा पर क्या अापकाे पता है कि भगवान शंकर पर दूध क्याें चढ़ाया जाता है। अगर अापकाे इस बारे में नहीं पता है ताे हम अापकाे इसके बारे में बताने जा रहे हैं।
विज्ञापन
2 of 5
शिवलिंग
समुद्र मंथन के दौरान जब विष निकला तो पूरी पृथ्वी पर विष की तीव्रता के कारण व्याकुलता छा गयी। सभी देवों ने भगवान शिव से विषपान करने की प्रार्थना की। भगवान् शिव ने जब विषपान किया तो विष के कारण उनका गला नीला होने लगा ताे सभी देवों ने विष की तीव्रता को कम करने के लिए शीतल दूध का पान करने के लिए कहा।
विज्ञापन
3 of 5
शिवलिंग
भोलेनाथ ने दूध से उनका सेवन करने की अनुमति मांगी। दूध से सहमति मिलने के बाद शिव ने उसका सेवन किया। इससे विष का असर काफी कम हो गया। बाकी बचे विष को सर्पों ने पिया। इस तरह समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष से सृष्टि की रक्षा की जा सकी। शिव के शरीर में जाकर विष के अनिष्टकारी प्रभाव को कम करने के कारण दूध भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।
4 of 5
शिवलिंग
यही कारण है कि शिवलिंग पर दूध जरूर चढ़ाया जाता है। जिसकी वजह से ये परम्पराएं और प्रथाएं सदियों से चली आ रहीं हैं। शिवलिंग पर दूध चढ़ाना भी ऐसे ही एक वैज्ञानिक कारण से जुड़ा हुआ है। सावन के महीने में मौसम बदलने के कारण बहुत सी बीमारियां होने की संभावना रहती है। इस मौसम में वात-पित्त और कफ के सबसे ज्यादा असंतुलित होते हैं।
दूध का सेवन करने से आप मौसमी और संक्रामक बीमारियों की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। इसलिए सावन में दूध का कम से कम सेवन वात-पित्त और कफ की समस्या से बचने का सबसे आसान उपाय है इसलिए पुराने समय में लोग सावन के महीने में दूध शिवलिंग पर चढ़ा देते थे।