कानपुर। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद (सअ) के दामाद और खलीफा हजरत अली की यौम-ए-पैदाइश जोशखरोश के साथ मनाई गई। इस मौके पर शिया युवा यूनिट की ओर से फूलबाग से जुलूस-ए-हैदरी निकाला गया। लोग हजरत अली के कौल (कथन) की लिखी तख्तियां लिए थे। जुलूस नवाबगंज बड़ी कर्बला में पहुंचकर समाप्त हुआ।
इस दौरान मौलाना अलमदार हुसैन ने कहा कि हजरत अली की पैदाइश 13 रजब को मुसलमानों के पवित्र धर्म स्थल खाना-ए-काबा में हुई थी। उनकी परवरिश भी रसूल के ही घर पर हुई। हजरत अली की शादी हुजूर की बेटी हजरत फातिमा जहरा से हुई थी। हजरत अली की मजार इराक के नजफ शहर में है। जुलूस से पहले मौलना नसीब अब्बास में सूखे के दौर में लोगों की मुश्किलें आसान करने और अल्लाह से अच्छे मानसून की दुआ की। जुलूस को सपा नगर अध्यक्ष फजल महमूद ने रवाना किया। जुलूस का बीएनएसडी कॉलेज के बाद अंजुमन हैदरी, चर्च रोड पर अंजुमने अब्बास अलमदार, मकबरा चौराहे पर आसिफ अब्बास के अलावा अन्य संस्थाओं ने स्वागत किया। अंत में बड़ी कर्बला में महफिल का आयोजन हुआ। इसमें तमाम शायरों ने हजरत अली की शान में कलाम पेश किए। निजामत तालिब हुसैन ने की और संयोजन नायाब आलम ने किया। इस मौके पर शारिब अब्बास, शादाब रिजवी, अबुजर हुसैन, मोहम्मद जकी, सादिक रिजवी. चंद्रेश सिंह आदि मौजूद रहे। इसके अलावा केडीए जाजमऊ शिया मस्जिद, मकबरा मस्जिद में भी रात को महफिल का आयोजन हुआ।
....यह वह चिराग है जो आंधियों में जलता है
कानपुर। ‘अली के नाम का सिक्का जहां में चलता है, यह वह चिराग है जो आंधियों में जलता है’ हजरत अली की यौम-ए-पैदाइश पर मोहम्मदी यूथ ग्रुप की ओर से कर्नलगंज में आयोजित महफिल में शायरों ने ये कलाम सुनाए। इस मौके पर उलमा ने हजरत अली की सीरत पर रोशनी डाली। उलमा ने हजरत अली की जिंदगी और उनके बताए रास्ते पर चलने और नमाज की पाबंदी पर जोर दिया। तकरीर के बाद सलातो सलाम का नजराना पेश किया गया। खानकाहे हुसैनी के बाहर राहगीरों को शर्बत और मिष्ठान दिया गया। इस मौके पर अखलाक डेविड, हाफिज अब्दुल वहीद, मुरसलीन खां, अनीसुल हसन, फाजिल चिश्ती, कफील हुसैन आदि मौजूद रहे।
मनाई यौम-ए-पैदाइश
कानपुर। चुन्नीगंज स्थित डीआईओएस कार्यालय के बाहर अंजुमन पंजतनी ने राहगीरों को शर्बत पिलाकर यौम-ए-पैदाइश मनाई। करबला आजम अली मस्जिद के इमाम मौलाना जावेद अली ने बताया कि हजरत अली इब्ने अली पैगंबर मोहम्मद साहब के दामाद थे। इनकी याद में यौम-ए-पैदाइश मनाई जाती है। हजरत अली ने गरीबों की मदद, एक दूसरे के साथ मिलकर चलने और दुनिया में इंसानियत बनाए रखने का पैगाम दिया था। लोगों को उन्हीं के बताए रास्ते पर चलना चाहिए। वहीं करबला आजम अली मसजिद में केक काटा गया और बच्चों को तोहफे दिए गए। तहरीक-ए-मिन्हाबुल कुरान इंटरनेशनल ने हलीम कॉलेज चौराहे व ग्वालटोली के विक्टोरिया मिल चौराहे पर लोगों को शर्बत पिलाया। उधर, साउथ सिटी में सूफी हजरात की ओर से बाबूपुरवा डाकखाने के पास देर रात तक लंगर और शरबत का वितरण किया गया। इस मौके पर जैगर खान, अमीम जाफरी, असरफ, मो. अलीम, नसीर खान, शमशुल अंसारी, सरवर मौजूद रहे।