‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन’, ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ और ‘डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन’ मिलकर जल्द ही शहर मेें ‘मेडिसिन बैंक’ की शुरुआत करेंगे। घरों में बची हुई दवाएं स्कूलों और अन्य लोगों के माध्यम से इस बैंक में जमा की जाएंगी।
एकत्रित दवा स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन (पर्चे) पर नि:शुल्क वितरित की जाएंगी। दवाएं लगातार महंगी होती जा रही हैं।
वरिष्ठ डॉक्टरों के अनुभव के अनुसार ज्यादातर लोग दवाओं का पूरा कोर्स नहीं करते हैं या इलाज के दौरान डॉक्टर दवाएं बदल देते हैं तो मरीज या उनके तीमारदार नई दवाएं तो खरीद लेते हैं।
पर उनमें से तमाम लोग पुरानी दवाएं वापस करने ही नहीं जाते अथवा दवाओं के पत्ते से इस तरह गोलियां निकालते हैं कि बची हुई दवाएं वापस नहीं हो पातीं। इस प्रकार देश में हर साल करोड़ों रुपये की दवाएं बर्बाद हो जाती हैं।
इसके मद्देनजर वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अवध दुबे के सुझाव पर ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ ने ‘मेडिसिन बैंक’ शुरू करने का फैसला किया है। आईएमए की अध्यक्ष डॉ. किरन पाण्डेय, डॉ. प्रवीण कटियार समेत कई पदाधिकारियों ने इस पर सहमति भी जता दी है।
डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र पटेल ने भी मेडिसिन बैंक के लिए सहमति जता दी है। उपलब्ध दवाओं का ब्यौरा कंप्यूटर पर अपडेट होता रहेगा। जल्द ही संयुक्त बैठक कर ‘मेडिसिन बैंक’ की शुरुआत की तारीख घोषित की जाएगी।
दवाएं एकत्रित करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसमें स्कूलों की भी भूमिका अहम रहेगी। स्कूलों में स्टूडेंट्स को भी इसके लिए मोटीवेट करने की योजना है। इस कार्य में अग्रणी रहने वालों को ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ और आईएमए प्रशस्त्रिपत्र देकर सम्मानित करेंगे।
जो लोग अपने घर में रखीं अनुपयोगी दवाएं इस बैंक में जमा करना चाहेंगे, वे भी ‘अमर उजाला’ दफ्तर आकर दवाएं जमा कर सकते हैं। कलेक्शन में शर्त रहेगी कि दवाएं एक्सपायर न हुई हों।